वीरवार को दो एमएम बारिश ने मौसम में बदलाव ला दिया। सुबह के समय हुई इस बारिश से किसानों का मंडी में पड़ा बाजरा भीग गया। बाजारों में कीचड़ फैल गया। तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी बूंदाबांदी के आसार हैं।
वीरवार की सुबह करीब पांच बजे मौसम में बदलाव आया। बूंदाबांदी शुरू होने के बाद तापमान में गिरावट आई। करीब 7 बजे दोबारा से फुहारें गिरना शुरू हो गई। दस बजे तक रुक-रुककर फुहारें गिरती रही। मौसम विभाग के रिकार्ड के अनुसार वीरवार को 2 एमएम बारिश हुई है। इस बारिश के बाद दिन भर आसमान में बादलों का प्रभाव रहा। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस तक आ गया। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी मौसम परिवर्तनशील रहेगा, जिसमें हल्की बारिश के आसार हैं। शनिवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। इस बारिश से सरसों की फसल को फायदा होगा। गेहूं, चना, जौ की फसल की बिजाई में तेजी आएगी। कपास की पछेती फसल को इस बारिश से कुछ नुकसान होगा। बारिश के बाद काफी किसान गेहूं, चना, जौ का बीज खरीदने के लिए शहर पहुंचे।
वीरवार को मंडी में करीब 7 हजार क्विंटल बाजरा भीग गया। दरअसल महेंद्रगढ़ अनाज मंडी में एक भी शेड नहीं है। किसानों का बाजरा खुले में रहता है। करीब 7 हजार क्विंटल बाजरा मंडी में पड़ा है, जिसका उठान होना बकाया है। बोरियों में पैक बाजरा अधिक भीगा। खुली ढेरी में पड़े बाजरे को किसानों ने बचाने के लिए तिरपाल आदि डाले। इसके बाद भी किसान अपनी फसल को भीगने से नहीं बचा सके।
मंडी में शेड नहीं होने के कारण हर बार किसानों को दिक्कत आती है। हरियाणा की कुछ ही मंडी ऐसी हैं जहां शेड नहीं है। मंडी में सफाई के भी कोई प्रबंध नहीं है। यहां शेड की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- ब्रह्म सिंह नंबरदार, गांव झूक
हर बार किसानों को साथ ऐसा ही होता है। उनकी फसल खेत नहीं मंडी में भी भीगती है। अब जो नुकसान होगा वह आढ़ती या सरकार का नहीं हमारा होगा। मंडी में शेड अनिवार्य होना चाहिए। सरकार मंडी टैक्स लेती है तो शेड भी बनाए
- ईश्वर सिंह, गांव माजरा कलां
मंडी में सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। दशकों पुरानी इस मंडी का हाल सबसे खराब है। यहां सफाई नहीं, शेड नहीं, पीने के लिए साफ पानी की भी पूरी व्यवस्था नहीं। सरकार को किसानों को सुविधा देनी चाहिए। केवल भाषण से काम नहीं चलता।
- रणधीर सिंह, गांव झूक
अनाज मंडी की बजाए इसे गंदगी मंडी कहना ठीक रहेगा। यहां नालियों से बह रहा गंदा पानी किसानों के बाजरे को खराब कर रहा है। बाजरा डालने के लिए फड़ पर जगह नहीं है। शेड नहीं होने से जरा सी बरसात में ही किसानों की फसल भीग जाती है।
- हनुमान, गांव कुराहवटा