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घोषणा के सात वर्ष बाद भी अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन नहीं हुई शुरू

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अलवर-चरखी दादरी रेलवे लाइन की घोषणा के सात वर्ष बाद भी पूरी नहीं हुई। केंद्र की यूपी-2 सरकार की तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 2012 अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन की सर्वे की घोषणा की थी उसके बाद एनडीए की सरकार ने 2014 में अपने पहले आधे बजट में महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी रेलवे लाइन को डबल ट्रैक करने की घोषणा की। दोनों ही घोषणाएं क्षेत्रवासियों के लिए घोषणा बनकर रह गई। वर्तमान सरकार ने किसी भी घोषणा को अमलीजामा नहीं पहनाया।
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महेंद्रगढ़-भिवानी के सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह ने इस मामले को एक बार लोकसभा नहीं उठाया। पहले वो इस रेलवे लाइन की घोषणा के लिए मना करते थे, अब कह रहे हैं कि सर्वे हो चुका है लेकिन फिजिबल ही नहीं है। परंतु सर्वे रिपोर्ट में फिजिबल नहीं होने का कोई कारण भी सांसद नहीं बता पा रहे। महेंद्रगढ़ जिले ने दोनों ही योजनाओं में सांसद को भारी भरकम वोटों से जीताकर भेजा था। परंतु अभी तक उसका प्रतिफल क्षेत्र को नहीं मिला है। इस घोषणा को लेकर पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा भी तत्कालीन रेल मंत्रीसुरेश प्रभु से कई बार मिल चुके हैं, उन्हें भी मंत्री से केवल आश्वासन ही मिला है। क्षेत्र की जनता ने केंद्र सरकार पर जो उम्मीद जताई थी सरकार उस पर खरा नहीं उतर पाई है।
अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन बन जाए और महेंद्रगढ़ तक डबल ट्रैक होने से दक्षिण हरियाणा के पिछड़े इलाके की तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे। साथ ही यहां के लोगों को प्रदेश के अन्य शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ने का सपना भी पूरा हो जाएगा। दूसरा महेंद्रगढ़ जिला राजधानी चंडीगढ़ से जुड़ जाएगा। लोगों को इस रेल लाइन के सर्वे की भाजपा सरकार से आस थी लेकिन अब तक वह पूरी नहीं हो पाई है। लाइन बिछने से प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ राजस्थान के लोगों को भी इसका फायदा होगा।
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यूं तो रेल मंत्रालय लोगों की सुविधा के लिए नित नई योजनाएं शुरू कर रहा है। फिर भी पिछड़े क्षेत्र के लोगों को रेल यात्रा से जो सुविधाएं मिलनी थी अभी तक नहीं मिल पाई है। वैसे तो रेलवे ने देश के हर क्षेत्र में रेल लाइनों का जाल बिछाया हुआ है लेकिन अलवर से वाया बहरोड़, नारनौल, महेंद्रगढ़ चरखी दादरी तक के रेल यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। इससे जिला के लोगों को दादरी, रोहतक, भिवानी, और हिसार आने-जाने में परेशानी होती है। जिले के नागरिकों तथा दैनिक यात्रियों की बार-बार मांग उठाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कई बार किया धरना प्रदर्शन
दैनिक रेलयात्री संघ ने अनेकों बार धरना प्रदर्शन करके इस लाइन का सर्वे करवाने और दिल्ली-सादलपुर लाइन पर नई रेल गाड़ियां, चलाने की मांग करते रहे हैं। परंतु न तो अभी तक इस रेल लाइन का सर्वे किया गया तथा न ही सराय रोहिल्ला दिल्ली सादलपुर रेलमार्ग पर नई गाडिय़ां चलाई गई है। जिसके चलते व्यापारियों, विद्यार्थियों सैनिकों, एवं कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।
लाइन बनने से खर्च होगा कम
अलवर से चरखी दादरी सड़क मार्ग का लगभग 160 किलोमीटर का फासला है जिसको तय करने में पांच घंटे का समय लगता है। इसका बस किराया लगभग 150 रुपये खर्च करना पड़ता है। यदि रेल सेवा प्रारंभ हो जाए तो एक यात्री पैसेंजर गाड़ी का लगभग 35 रुपये और एक्सप्रेस गाड़ी का 70 रुपये किराया पड़ता है। बसों में यात्रियों को अधिक समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
डबल ट्रैक बनने से महेंद्रगढ़ तक बढ़ेंगी गाड़ियां
रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक रेलवे लाइन का डबल ट्रैक कर दिया जाए तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता को काफी फायदा होगा। साथ ही रेवाड़ी को रात्रि के समय ठहराव होने वाली गाड़ियों का बोझ भी कम हो जाएगा। जो गाड़ियां रात्रि के समय रेवाड़ी जंक्शन पर खड़ी होती है अगर वो महेंद्रगढ़ आकर खड़ी होंगी तो इससे महेंद्रगढ़ की जनता गाड़ी मिल जाएगी, दूसरा रेवाड़ी स्टेशन पर गाड़ियों का दबाव कम हो जाएगा।
यूपीए-2 सरकार ने अलवर-चरखी दादरी रेलवे लाइन की घोषणा की थी। मोदी सरकार ने आने के बाद इस योजना को ड्राप कर दिया। महेंद्रगढ़ में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय बना है। देश विदेश से यहां लोग पढ़ने आते हैं। इसलिए विद्यार्थियों और लोगों की सुविधा को देखते हुए हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि योजना को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
- राव दान सिंह, विधायक (कांग्रेस), महेंद्रगढ़।
अलवर चरखी दादरी रेलवे लाइन की सर्वे हो चुका है। इस सर्वे में रेलवे लाइन को फिजिबिलिटी नहीं दिखाया।
- चौधरी धर्मबीर सिंह, सांसद, महेंद्रगढ़-भिवानी लोकसभा।
अलवर से चरखी दादरी रेलवे लाइन का सर्वे हो चुका है जहां तक पता लगा है कि बजट के कारण इस रेलवे लाइन को रोक दिया गया है। इस मांग को मैंने 7 नवंबर को जोनल स्तर की मीटिंग में भी उठाया था। सांसद को भी इस मामले का संसद में प्रमुखता से उठाना चाहिए। इस मांग को लेकर सांसद धर्मबीर से फिर मिलेंगे।
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- सुंदरलाल जोरासिया, डीआरयूसीसी मेंबर जयपुर मंडल।
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