बढ़ती सर्दी में कोहरे ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। धुंध में वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है। लेकिन रोडवेज बसें सड़कों पर बिना फॉग लाइट के ही दौड़ रहीं हैं। इससे हर रोज तकरीबन 12 हजार जिंदगियां जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं।
विभाग की ओर से फॉग लाइटों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा जबकि विभाग के निदेशालय की ओर से साफ निर्देश हैं कि फॉग सीजन शुरू होते है। सीजन शुरू होते ही लाइटों को लगाया जाए। फॉग लाइटों की वजह से धुंध के मौसम में हादसों का आशंका कम हो जाती है क्योंकि ये पीली लाइटों की वजह से रास्ता कुछ साफ दिखाई देता है।
128 बसें चलती हैं रूट पर
विभाग के नारनौल डिपो की 128 बसें इस समय रूट पर दौड़ रही हैं। इन बसों के द्वारा हर रोज करीब 50 हजार किलोमीटर का सफर तय किया जाता है। वहीं 12 हजार यात्रियों को ये प्रतिदिन अपने गंतव्य तक पहुंचाती हैं। रोडवेज बसों के द्वारा नारनौल डिपो के खाते में प्रतिमाह 12 लाख रुपये की कमाई जमा होती है। विभाग के पास होने वाली कमाई के बावजूद विभाग अपने यात्रियों के प्रति सुविधाएं उपलब्ध करवाने और उनकी जान की सुरक्षा करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
नहीं है डिपो के पास लाइटें
विभागीय सूत्रों की मानें तो फोग सीजन शुरू होने के बावजूद फॉग लाइटों का टोटा है। अभी तक बसों पर ये लाइटों के न लग पाने का एक मुख्य कारण यह भी है। वहीं अगर ये डिपो के पास ये लाइटें नहीं थी तो आखिरकार इनकी खरीद में इतनी देरी क्यों की जा रही है, यह सोचने का विषय है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो लाइटों की खरीद के लिए कोई टेंडर नहीं छोड़ा जाता, बल्कि सीधे ही आर्डर देना पड़ेगा।