नारनौल। मैदानी राज्य विशेष तौर पर पंजाब व उत्तरी हरियाणा और पड़ोसी देश पाकिस्तान में पराली जलाने की घटनाओं के कारण क्षेत्र में प्रदूषण स्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। आगामी दिवाली पर्व पर होने वाली आतिशबाजी के कारण भी प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह कई दिनों तक बना रहता है। इसका स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से अस्थमा और फेफड़ों संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पटाखों से होने वाले प्रदूषण के कारण आंखों में जलन की समस्या भी बनी रहती है।
प्रतिबंध के बावजूद भी हो रही बिक्री
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन फिर भी क्षेत्र में अवैध रूप से पटाखों की बिक्री की जा रही है। अवैध रूप से हो रही पटाखों की बिक्री को रोकने के लिए पुलिस द्वारा छापेमारी की जा रही है। लेकिन बिक्री को पूर्णतया रूप से रोकने के लिए यह प्रयास नाकाफी है।
ग्रीन पटाखें हो सकते हैं विकल्प
पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा लोगों को ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। ग्रीन पटाखें प्रदूषण को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि इनमें हानिकारक गैसों का उत्सर्जन 15 से 30 फीसदी कम होता है।
पटाखों का पशु और पक्षियों पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव
वायु प्रदूषण के साथ-साथ पटाखों का पशु और पक्षियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पटाखों के शोर के कारण पक्षियों में डर का माहौल बन जाता है। यहां तक कुछ छोटे पक्षियों की तो मौत भी हो जाती है। सामान्य से अधिक शोर के कारण गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते इत्यादि में भी घबराहट और तनाव बढ़ जाता है।
आस-पास क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं के कारण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा हुआ है। पटाखों के कारण भी प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होना स्वभाविक है। क्षेत्र में अभी एक्यूआई का स्तर 125 से 180 के बीच बना हुआ है। संभावना है कि पटाखों के कारण प्रदूषण स्तर 200 से 250 तक पहुंच सकता है।
डॉ. चंद्रमोहन, नोडल अधिकारी पर्यावरण क्लब, राजकीय महाविद्यालय, नारनौल।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। विशेष तौर पर उन लोगों को ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ता है, जो पहले से अस्थमा के रोगी है। पटाखों से होने वाले प्रदूषण से बचाव के लिए पटाखे फोड़े जाने के समय घरों के अंदर रहें। अगले एक दो दिन जब भी घर से बाहर निकले मास्क का प्रयोग अवश्य करें। सांस संबंधित अधिक समस्या होने पर चिकित्सक परामर्श अवश्य लें।
डॉ. जितेंद्र यादव, फिजिशियन नागरिक अस्पताल, नारनौल।