दिल्ली में पूर्व सैनिक के जंतर-मंतर पर सुसाइड करने के बाद शहीद होने या नहीं होने को लेकर पूरे देश में हो-हल्ला मचा हुआ है। लेकिन रेवाड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें सेना में तैनाती के दौरान ही एक जवान ने ऑपरेशन रक्षक के समय कारगिल के द्रास सेक्टर में पेट्रोलिंग करने के दौरान शहादत दे दी थी। शहीद हुए जवान का नाम सूरजभान राठी था और वह जिले के गांव बालावास जाट का रहने वाला था। वाक्या 2001 का है, जब रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज थे और केंद्र सरकार की ओर से सूरजभान राठी को शहीद का दर्जा मिला, लेकिन 15 साल बीतने के बावजूद राज्य सरकार सूरजभान राठी को शहीद नहीं मान पाई है और परिवार जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के चक्कर काटने को मजबूर है।
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26 साल की उम्र में दी शहादत
बालावास जाट में 15 अगस्त 1975 को जन्मे सूरजभान राठी ने महज 19 साल की उम्र में सेना ज्वाइन कर ली थी। वे 19 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर थे। पहले राजस्थान के श्रीगंगानगर और बाद में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में हुई। यहां उनको द्रास सेक्टर में पेट्रोलिंग मिली। 26 दिसंबर 2001 को तीन अन्य जवानों के साथ पेट्रोलिंग (गश्त) करते समय ग्लेशियर पिघल गया और बर्फ में दबने से सूरजभान व अन्य जवानों की मौत हो गई। ऐसे में महज 26 साल की उम्र में ही उन्होंने देशसेवा करते हुए शहादत दे दी।
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बेटे को भी नहीं देख सके थे सूरजभान
सेना में कुछ साल नौकरी के बाद ही उनकी शादी सुमन देवी से हुई थी। पति की फोटो देखते हुए नम आंखों से सुमन देवी बताती हैं जिस दिन वे दिसंबर 2001 में शहीद हुए उससे महज 1 महीने पहले ही 27 नवंबर 2001 को उनके बेटे का जन्म हुआ था। लेकिन बेटे के जन्म से पहले ही वह कारगिल के द्रास सेक्टर में देशसेवा के लिए चले गए थे। कुछ समय बाद उन्हें बेटे का पहली बार चेहरा देखने आना था। लेकिन वह अपने बेटे का चेहरा कभी नहीं देख सके।
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राजनेताओं के बगल में लगी प्रतिमा, फिर क्यों नहीं शहीद
गांव में जो स्मारक बना है, उसमें एक ओर ताऊ देवीलाल और दूसरी ओर सर छोटूराम की प्रतिमा लगी है, वहीं बीच में शहीद सूरजभान राठी की बावर्दी प्रतिमा है। वीरांगना सुमन देवी बताती हैं कि 2003 में तत्कालीन राज्यपाल बाबू परमानंद ने स्मारक का अनावरण किया था, तब राज्य सरकार को सूरजभान को शहीद का दर्जा देने की सभी कार्यवाही पूरी करने की ताकीद दी थी। बावजूद इसके सुमन देवी 15 सालों से पति को शहीद का दर्जा दिलवाने के लिए भटक रही हैं।
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गोली लगने पर ही मिलेगा शहीद का दर्जा
जिस समय सूरजभान देशसेवा करते हुए शहीद हुए उस दौरान इनेलो सरकार थी और ओमप्रकाश चौटाला सीएम थे। सुमन देवी आगे बताती हैं कि केंद्र से शहीद का दर्जा मिलने के बाद राज्य सरकार में अप्लाई किया तो जवाब मिला कि राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सेना में ड्यूटी करने के दौरान दुश्मन की गोली लगने से मौत होने पर ही शहीद का दर्जा मिलेगा।
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-बेटा बॉक्सिंग चैंपियन पर नहीं भेजूंगी सेना में
शहादत दिलाने के लिए जारी संघर्ष ने सुमन को दिल से तोड़ दिया है। बताती हैं कि उनका बेटा अमन 15 साल का हो गया है। बॉक्सिंग में स्टेट लेवल चैंपियन भी रहा है। स्पोर्ट कोटे से भविष्य में किसी और विभाग में नौकरी लगवा दूंगी लेकिन सेना में नहीं भेजूंगी। क्योंकि पति ने जवानी में देश के लिए शहादत दी, लेकिन राज्य सरकार नहीं मान रही। ऐसे में बेटे को क्यों भेेजूं।
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मामला अमर उजाला के माध्यम से संज्ञान में आया है। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के सेकेट्री प्रताप सिंह से एप्लीकेंट सुमन देवी के जमा दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। प्रशासन की ओर से चेक कर वैलिड होने की स्थिति में तत्काल मदद की जाएगी। वहीं इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-डॉ.यश गर्ग, उपायुक्त, जिला रेवाड़ी