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उम्मीदों भरे भारत के निर्माण में नीति, नीयत और नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण ः संजय धोत्रे

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हकेंवि के सातवें दीक्षांत समारोह में उपाधि प्रदान करते कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़। संवाद - फोटो : Narnol
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ ने 27 फरवरी को अपना सातवां दीक्षांत समारोह मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे मुख्य अतिथि और भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य धर्मबीर सिंह ऑनलाइन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में 757 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पीएचडी, एमफिल, स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधि व स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। स्नातक पाठ्यक्रमों के तहत बीटेक के 107 तथा बीकॉम के 55 व स्नातकोत्तर के 573 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। 14 शोधार्थियों को पीएचडी एवं 8 को एमफिल की उपाधि दी गई। 757 विद्यार्थियों व शोधार्थियों में 441 छात्र और 316 छात्राएं हैं। इनमें से 562 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। विश्वविद्यालय के मूलचंद सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह की शुरुआत कुल गीत से की गई।
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संजय धोत्रे ने कहा कि आज का भारत उम्मीदों का भारत है। नए भारत के निर्माण में नीति, नीयत और नेतृत्व की भूमिका अहम है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है। समूचा विश्व भारत के प्रति सम्मान रखता है और इसकी ओर उम्मीदभरी निगाहों से देख रहा है।
डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों से धोत्रे ने कहा कि आज का यह दिन आप सभी के लिए बेहद खास है। आप सभी ने इस दिन के लिए कड़ी मेहनत की है। साथ ही आपके माता-पिता ने भी इस स्थान पर देखने के लिए बहुत त्याग किया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में देश को वैश्विक ज्ञान का सुपरपावर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के मार्गदर्शन में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो रही है। यह शिक्षा नीति मल्टी डिस्पिलनरी एप्रोच के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के अवसर प्रदान करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालयों व विद्यार्थियों की भूमिका की सराहना की।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हमने सामने आई चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के अपने लक्ष्य और दृष्टिकोण को कमजोर नहीं होने दिया।
कुलपति ने कहा कि तीन नई शोध परियोजनाओं एवं पिछले एक वर्ष में अतिरिक्त अनुदान के रूप में 25.70 लाख रुपये जारी किए जाने के साथ वर्तमान में संकाय सदस्यों द्वारा 20 वित्त पोषित शोध परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा पिछले एक वर्ष के दौरान 3 नए पेटेंट दायर किए गए। 4 पेटेंट प्रकाशित किए गए। विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और 83 पुस्तकों या पुस्तक अध्यायों में 195 शोध पत्र प्रकाशित किए। इसी कड़ी में सूक्ष्मजीव विज्ञान और खाद्य सुरक्षा विषयक मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स ने 50 से अधिक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, संस्थानों व खाद्य उद्योगों के 3617 शिक्षार्थियों के रिकॉर्ड नामांकन के साथ तीसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस कोर्स का यूजीसी और सीईसी ने 10 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में अनुवाद एवं इसके उप शीर्षक की शुरुआत की है। सफलतापूर्वक अनुवाद के बाद इसे ‘स्वयं’ प्लेटफार्म पर प्रस्तुत किया जाएगा।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद, शैक्षणिक परिषद व विश्वविद्यालय की कोर्ट के सदस्यों के अलावा विभिन्न शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालय की विभिन्न पीठों के अधिष्ठाता, कुलसचिव डॉ. जेपी भूकर, परीक्षा नियंत्रक डॉ. विपुल यादव, वित्त अधिकारी मनोरंजन त्रिपाठी, विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी व शोधार्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन जुडे़ रहे।
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