कॉलेज परिसर को गाजर घास मुक्त रखने का संकल्प लेते विद्यार्थी व स्टाफ। स्रोत : कॉलेज
बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर बावल में 22 अगस्त तक पार्थेनियम उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. सत्यजीत ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पार्थेनियम के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
उन्होंने बताया कि पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस को सामान्यत: गाजर घास कहा जाता है। यह तेजी से फैलने वाला हानिकारक खरपतवार है, जो फसल उत्पादन, जैव विविधता और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इसके संपर्क से मनुष्यों में त्वचा संबंधी एलर्जी और श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि समय पर निराई-गुड़ाई, उखाड़ने और उचित खरपतवार प्रबंधन से इसका नियंत्रण किया जा सकता है। पुष्पन व बीज बनने से पहले उन्मूलन और नियमित निगरानी प्रभावी उपाय हैं।
अभियान का समन्वय डॉ. मोहिंदर सिंह व डॉ. हरीश कर रहे हैं। परिसर में पार्थेनियम उन्मूलन किया गया। कृषि विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी कर परिसर को पार्थेनियम मुक्त रखने का संकल्प लिया।