फोटो नंबर- 16नई अनाज मंडी में लगी बाजरे की ढेरी से बाजरा खाता बेसहारा गोवंश। संवाद
नारनौल। आठ दिन तक हैफेड के नियमों, व्यापारियों के कम भाव और ई-खरीद पोर्टल पर डाटा अपडेट न होने से परेशान किसानों के लिए शुक्रवार का दिन राहत लेकर आया। बाजरे का बाजार भाव 2300 से 2400 रुपये तक पहुंच गया जो किसान बीते 8 दिनों से एमएसपी से कम दाम पर बाजरा बेचने को मजबूर थे, उन्होंने अब निर्धारित एमएसपी पर अपनी फसल बेची।
भाव बढ़ने का असर मंडी की रौनक पर भी दिखा। शुक्रवार को नारनौल में करीब 652 गेटपास जारी किए गए और लगभग 17400 क्विंटल बाजरे की आवक हुई। इसी दौरान विधायक ओमप्रकाश यादव ने नई अनाज मंडी का दौरा किया, खरीद व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को बेहतर इंतजाम बनाए रखने के निर्देश दिए।
कार्रवाई का दिखा असर
स्वास्थ्य मंत्री की मांग पर उपायुक्त ने जिला प्रबंधक पर कार्रवाई को लेकर एमडी को पत्र भेजा था। इसके बाद हैफेड ने भी खरीद शुरू की और व्यापारियों की बोली में भी भाव ऊंचे बने रहे। मंडी में करीब 22 हजार क्विंटल बाजरा व्यापारियों ने और 35 क्विंटल हैफेड ने खरीदा। अधिकतर बाजरा 2300 से 2400 रुपये के भाव पर बिका।
बेसहारा गोवंश बने समस्या
मंडी में बेसहारा गोवंश किसानों और व्यापारियों के लिए परेशानी बने हुए हैं। वे खाने की तलाश में बाजरे की ढेरियों को नुकसान पहुंचाते हैं। गोवंश के आपस में लड़ने से हादसे का खतरा भी रहता है। किसानों और व्यापारियों ने मार्केट कमेटी प्रशासन से सब्जी मंडी की तरफ तारबंदी करवाने की मांग की, ताकि गोवंश अनाज मंडी में न घुस सकें।
वर्जन :
सरकार का प्रयास है कि किसानों को फसल बेचते समय कोई परेशानी न हो। कुछ ढेरियों का भाव 2400 रुपये से भी ऊपर रहा। खरीद प्रक्रिया सुचारु रखने और किसानों को सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ओमप्रकाश यादव, विधायक, नारनौल।