नारनौल। पटीकरा स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की शिक्षिका पवित्रा यादव ने जनगणना कार्य में अपनी प्रतिबद्धता और अनुभव से अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2001 की जनगणना के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें जनगणना कांस्य पदक से सम्मानित किया गया था।
57 वर्षीय पवित्रा यादव अब तक वर्ष 2001 और 2011 की जनगणना में बतौर प्रगणक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। 2026-27 की जनगणना में भी वे प्रगणक के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगी। उनके पास करीब 25 वर्षों का अनुभव है जो इस महत्वपूर्ण कार्य में उनकी दक्षता को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार, एक प्रगणक को आमतौर पर 150 से 200 घरों का क्षेत्र आवंटित किया जाता है जिनकी जनगणना निर्धारित समय में पूरी करनी होती है। वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान घरों की गिनती, नंबरिंग और परिवार से जुड़े 32 सवाल पूछे जाते थे जिसमें एक परिवार पर करीब 30 से 40 मिनट का समय लगता था। हालांकि, अब तकनीक के इस्तेमाल से जनगणना प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो गई है।
अनुभव से मिल रहा मार्गदर्शन
वर्तमान जनगणना में कई नए प्रगणक पहली बार इस कार्य में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में पवित्रा यादव का अनुभव उनके लिए मार्गदर्शक साबित हो रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने साथियों को कार्य के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में जानकारी दी जिससे नए प्रगणकों को काफी सहायता मिल रही है।
वर्जन
जनगणना का कार्य एकाग्रता व ध्यानपूर्वक किया जाना वाला काम है। वर्ष 2001 की जनगणना के दौरान बेहतर कार्य करने पर राष्ट्रपति द्वारा मिला जनगणना कांस्य पदक का सम्मान मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक है। सेवानिवृत्ति से पहले एक और जनगणना का हिस्सा बनकर मैं बहुत खुश हूं। तकनीकी विकास के कारण पहले की तुलना में अब जनगणना का कार्य का सुगम हो गया है।
पवित्रा यादव, शिक्षिका, राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय पटीकरा