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Mahendragarh-Narnaul News: पौष अमावस्या आज...पितृ शांति और दान-पुण्य का विशेष योग

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फोटो नंबर-26आचार्य क्राति निर्मल।
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नारनौल। हिंदू धर्म में पौष अमावस्या को अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। वर्ष 2025 की यह अंतिम अमावस्या शुक्रवार को पड़ेगी। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, पौष अमावस्या पर किए गए धार्मिक कर्मों से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
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आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री के अनुसार, पौष अमावस्या के दिन श्रद्धा पूर्वक दान करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही पाप, आर्थिक क्षति, कर्ज और जीवन में आ रही बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है। इस अवसर पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान अत्यंत फलदायी माना गया है।
काले तिल का दान
पितरों की आराधना में काले तिल का विशेष स्थान है। मान्यता है कि काले तिल से किया गया तर्पण सीधे पितृलोक तक पहुंचता है जिससे पितृ संतुष्ट होते हैं और अकाल मृत्यु से जुड़े दोष शांत होते हैं।
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अन्न व गुड़ का दान
शास्त्रों में अन्नदान को महादान कहा गया है। पौष अमावस्या पर चावल, गेहूं, जौ व अन्य अनाज का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और आर्थिक परेशानियां व कर्ज से मुक्ति का योग बनता है। इस दिन गुड़ का दान करने से कुंडली में सूर्य और गुरु की स्थिति मजबूत होती है। इससे भाग्य का उदय होता है और करियर व कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं।
कंबल व गर्म कपड़ों का दान
पौष माह की कड़ाके की ठंड को देखते हुए जरूरतमंदों को कंबल व गर्म कपड़ों का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। इससे जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।
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