नारनौल। किमी स्कीम के तहत संचालित बसों के चालकों के लिए दक्षता परीक्षण अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य चालक के ड्राइविंग कौशल को जांचना है। परीक्षण में पास होने वाले चालक को ही बस चलाने की अनुमति दी जाएगी। वहीं परीक्षण में फेल होने पर चालक को बदलने के लिए एजेंसी को अवगत कराया जाएगा।
इन बसों के परिचालक तो प्रशिक्षण प्राप्त रोडवेज कर्मचारी होते हैं, वहीं चालक एजेंसी की ओर से होते हैं। बस चलाने से पहले चालक ने कहां से प्रशिक्षण प्राप्त किया है व कितना अनुभव है, इसके बारे में कोई जांच नहीं की जाती है।
गत कुछ वर्षों में जिले में कई हादसे किमी स्कीम के बस चालक की लापरवाही से हुए हैं। अब सभी डिपो में किमी स्कीम के तहत संचालित बसों के चालक के लिए दक्षता परीक्षण अनिवार्य किया गया है। बता दें कि नारनौल डिपो में 20 किलोमीटर स्कीम की बसें चल रही है।
तीन गुना कम वेतन और कार्यभार दोगुना
किमी स्कीम के तहत संचालित बस के चालक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें एजेंसी की ओर से केवल 15 से 20 हजार रुपये का वेतन दिया जाता है जो रोडवेज कर्मचारियों की तुलना में करीब तीन गुना कम है। वहीं प्रतिदिन उन्हें करीब 400 से 450 किमी तक बस चलानी पड़ती है जबकि रोडवेज चालक एक दिन में 250 से 350 किमी तक ही बस चलाता है। चालकों ने बताया कि एक छुट्टी करने पर दो दिन के रुपये काट दिए जाते हैं।
चालकों का लापरवाही से हुई दुर्घटनाएं
- करीब डेढ़ वर्ष पहले किमी स्कीम बस ने रेवाड़ी रोड पर कृषि विभाग के पास गाड़ी को टक्कर मारी।
- करीब आठ माह नशे की हालत में किमी स्कीम बस के चालक ने बस को अटेली में सड़क किनारे बनी झुग्गियों में घुस दी थी।
- करीब 4 माह पहले नशे की हालत में चालक बस चला रहा था और बस स्टैंड पर खड़े निजी वाहन को टक्कर मारी।
- करीब एक सप्ताह पहले नांगल चौधरी रोड़ पर तेज रफ्तार बस ने गोवंश को टक्कर मारी और दो गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई।
वर्जन :
उच्च विभाग के निर्देशानुसार किमी स्कीम के तहत संचालित बसों के चालक का दक्षता परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण में पास होने वाले चालक को ही बस चलाने की अनुमति दी जाएगी। वहीं नांगल चौधरी रोड पर गोवंश को टक्कर मारे जाने वाले मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। -देवदत्त, महाप्रबंधक, नारनौल डिपो