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Mahendragarh-Narnaul News: अब छह महीने नहीं छह घंटे में मिल जाएगी भूजल की जानकारी

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नारनौल। अब बरसात के सीजन में भू-जलस्तर में सुधार या फिर गिरावट के बारे में आसानी से पता किया जा सकता है। इसके लिए अटल भूजल योजना के तहत प्रदेश के 14 जिलों में डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जा रहे हैं, जिससे हर छह घंटे में पानी के जलस्तर के बारे में आसानी से पता किया जा सकता है। डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर प्रदेश में 1000 लगाए जाने हैं। इसमें से अब तक प्रदेश के 14 जिलों में 724 लगाए जा चुके हैं। इनमें करनाल, कैथल, पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी, दादरी, महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, रेवाड़ी, पलवल और गुरुग्राम जिले शामिल हैं। वहीं प्रदेश के अलावा डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर गुजरात में 848 जगह लगाने का लक्ष्य रखा गया है, वहां अब तक 738 जगह लगाया जा चुका है। कर्नाटक में 365 में से 124, मध्यप्रदेश में 110 में से 6, महाराष्ट्र में 657, उत्तर प्रदेश में 392 में से 223 और राजस्थान में अभी शून्य है। ऐसे में अब इन राज्यों में डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाने के बाद अधिकारी अपने कार्यालय में बैठे भूजलस्तर को लेकर जानकारी हासिल कर सकेंगे। संवाद
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छह माह नहीं करना होगा इंतजार

अटल भूजल योजना की ओर से जलस्तर में सुधार के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में पहले नहरों को रिचार्ज, डैम बनाकर पानी से भरने के बाद भी भूजलस्तर में सुधार की जानकारी जून व अक्तूबर में ही पता चल पाता था। ऐसे में अब डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगने से हर छह घंटे में अधिकारी अपने कार्यालय में बैठे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जिले के किसी भू-भाग में पीने योग्य पानी नहीं है तो कही नहरी पानी की वजह से जलस्तर काफी ऊपर है। ऐसे में गांवों के गिरते जलस्तर की समय पर जानकारी नहीं मिल पाती थी, लेकिन वाटर लेवल रिकॉर्डर लगने की वजह से हर छह घंटे बाद जलस्तर की जानकारी मिल सकेगी।


मोबाइल पर ले सकते हैं गांव की जानकारी

अगर कोई सरकारी कार्यालय में जाने के लिए असमर्थ हैं तो वह अटल जल एप डाउनलोड कर सकते हैं, जिसमें बीते दिन के भू-जलस्तर की जानकारी ले सकता है। वहीं गांव में किस ट्यूबवेल पर पानी पीने योग्य है, उसकी भी जानकारी मिल सकती है। इसके अलावा गांव में इस बार कितनी बारिश हुई है। इसकी भी अटल जल एप पर जानकारी ले सकते हैं।
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कैसे लगाए जाते हैं डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर

डिजिटल वाटर लेवल रिकाॅर्डर लगाने के लिए पहले नया ट्यूबवेल बनाया जाता है। नए ट्यूबवेल में पानी की मोटर लगाते समय डिजिटल वाटर लेवल रिकाॅर्डर भी लगा दिया जाता है, जिसके बाद उसकी जानकारी संबंधित विभाग को हर छह घंटे में मिलनी शुरू हो जाती है।


जिले के 155 गांवों के स्कूल व सार्वजनिक जगहों पर ट्यूबवेल किए जा रहे हैं। इनमें से 116 गांवों में डिजिटल वाटर लेवल रिकाॅर्डर लगाए जा चुके हैं। जिले के अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल, कनीना और नांगल चौधरी इस योजना में शामिल हैं।
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-रोहित शुक्ला, अटल भूजल, जिला विशेषज्ञ।
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