नारनौल। शहर के लोगों की आस्था का केंद्र प्राचीन मां चामुंडा देवी मंदिर ट्रस्ट का मामला इन दिनों एक बार सुर्खियों में आ रहा है। ट्रस्ट के खिलाफ याचिका लगाने वाले नरेंद्र सोनी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि इस मामले में दो बार कोर्ट का फैसला आने के बाद भी ट्रस्ट अपना अधिकार नहीं छोड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि इस मंदिर पर शहर के दो परिवारों ने अपना कब्जा जमा लिया है। नरेंद्र सोनी ने बताया कि ट्रस्ट में हो रही है अनियमितता, चांदी व चांदी में हेराफेरी को अतिरिक्त सिविल जज नारनौल ने सही मानकर गत 4 जनवरी 2020 को ट्रस्ट भंग कर दिया था। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने चांदी व मंदिर में आए चंदे के गबन को सही माना था। इसके बाद यदि उनमें नैतिकता होती तो वे मां चामुंडा देवी से माफी मांग कर अपने आप ही ट्रस्ट से अलग हो जाते, लेकिन वे इस तरह से अदालत दर अदालत जा रहे हैं, जैसे यह मंदिर ट्रस्ट की नहीं, उनकी ही संपत्ति है।उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले मुझे मंदिर का रिसीवर नियुक्त किया था। इसके बाद अब अपील न्यायालय ने जिला समाज कल्याण अधिकारी अमित शर्मा को रिसीवर नियुक्त किया है। इस फैसले का वे स्वागत करते हैं तथा इसके विरोध में उच्च न्यायालय में नहीं जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यदि भंग ट्रस्ट के प्रधान सूरज बोहरा और अन्य पदाधिकारी अपीलीय न्यायालय के फैसले के विरुद्ध पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जाते हैं तो फिर वे भी मूर्ति मां चामुंडा देवी की पैरवी हाईकोर्ट में करेंगे। उन्होंने बताया कि अपीलीय न्यायालय ने उनकी अपील को खारिज करते हुए अब जिला समाज कल्याण अधिकारी अमित शर्मा को रिसीवर नियुक्त किया है व 6 माह में नया ट्रस्ट गठित करने की हिदायत भी दी है। इसमें न्यायालय ने पुराने किसी भी ट्रस्टी को नए ट्रस्ट में शामिल नहीं करने की हिदायत दी है। इस मौके पर उनके साथ शहर के कई लोगों मौजूद थे।
हमने 2020 में ही ट्रस्ट को छोड़ दिया था। जिसके बाद से हमारा भी ट्रस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार है।
सूरज बोहरा, पूर्व प्रधान मां चामुण्डा देवी मंदिर ट्रस्ट।