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नोटबंदी के साइड इफेक्ट

Mon, 19 Dec 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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note - फोटो : अमर उजाला
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नारनौल। भले ही नोटबंदी से आम आदमी हलाकान हो। बैंकों व एटीएम के बाहर लंबी लाइनें में समय बीत रहा हो। इसके बावजूद कुछ जगहों पर नोटबंदी का के इफेक्ट भी दिखाई दे रहे हैं। जिससे जहां लोगों को फील गुड महसूस हो रहा है। वहीं व्यापारी खासे परेशान हैं।
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सब्जी मार्केट की बात की जाए तो वहां पर नोटबंदी के बाद से महंगाई गायब है। 100 रुपये में भी जरा सी आने वाली सब्जी आज 50  रुपये में झोला भरकर आ रही हैं।

वहीं सब्जियां की कीमत में आई कमी के कारण सब्जी विक्रेता परेशान हैं। सस्ती होने के बावजूद उनकी सब्जी नहीं बिक पा रहीं तथा कई क्विंटल सब्जी रोजाना वेस्ट हो रही है।
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एक दशक  के बाद सब्जियां की कीमतों में रिकार्ड गिरावट आई है।

हालांकि बाजारों में रोज रेट में परिवर्तन भी हो रहा है। सब्जी के व्यापारी रमेश कुमार व हरिकिशन बताते हैं कि नोट बंदी के असर से सब्जियों में रेटों में जबरदस्त गिरावट आई है। आलू, मटर, गोभी, बंद गोभी, बैंगन, शिमला मिर्च आदि सब्जियों की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। इसलिए सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी नहीं होगी। बल्कि सब्जियां सस्ती ही मिलेगी।

पैसे नहीं तो पुण्य ही मिल जाए
सब्जी सस्ती होने के बावजूद लोग सब्जी नहीं खरीद रहे। यही कारण है कि रोज कई क्विंटल सब्जी सब्जी विक्रेताओं व सब्जी मंडी में बच जाती है। इस बची हुई सब्जी को विक्रेता गोशाला पहुंचा रहे हैं, ताकि कुछ पुण्य की प्राप्ति हो जाए।  

मौसमी सब्जियां सस्ती
मौसमी सब्जियां सस्ती होने से लोगों के चेहरे खिले हुए हैं। गोभी, बैंगन, मटर, टमाटर, गाजर आदि  सस्ते हो गए हैं।

सिंघाना रोड पर दुकान लगाने वाले रमेश कुमार कहते है कि मौजूदा समय में आस-पास के गांवों से मौसमी सब्जियों की आपूर्ति हो जाती है। इस वजह से सब्जियां सस्ती हो जाती है। नोटबंदी भी एक बहुत बड़ा कारण है।

सब्जियां के यह है रेट
सब्जी    पहले    अब
आलू       25     10
गोभी       10     05     
मूली        20     10
मटर        40      20
टमाटर      25      10
बैंगन       30      15
प्याज       20      12
गाजर       20      10
खीरा        30      20

लोगों  ने खरीददारी कम कर दी हैं। हरी सब्जियों को अधिक दिनों तक स्टॉक करकर नहीं रख सकते।
ऐसे में खरीदी कीमतों पर दुकानदार बेच रहे हैं। -अजीत सैनी,  प्रधान सब्जी मंडी
नोटबंदी के बाद से सब्जी की बिक्री कम हो गई थी।
जिसके कारण दाम कम होते गए। अब भी इसका असर है। -गंगाराम, सचिव, सब्जी मंडी
सब्जियों के दाम कम होने के बावजूद लोग कम ही सब्जियां खरीद रहे हैं। इसका मुख्य  कारण नोटबंदी ही है।

लोगों के पास अभी भी कैश की समस्या है। -नरेंद्र  कुमार, सब्जी विक्रेता
मंडी व बाहर कहीं भी सब्जी नहीं बिक रही। इससे बड़ी परेशानी हो रही है। कई क्विंटल सब्जी गोशाला पहुंचाई जा रही है। वहीं कई क्विंटल सड़ भी रही हैं। -रोशनलाल, सब्जी विक्रेता
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