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गांवों में बनाए गए आईसोलेशन केंद्रों में नहीं कोई सुविधा

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कनीना। गांवों में बनाए आइसोलेशन केंद्रों में सुविधाएं नहीं होने से वे मरीजों के किसी काम नहीं आ रहे हैं। इन केंद्रों स्थिति ऐसी है कि यह बेड नहीं बल्कि जमीन पर ही गद्दे बिछाए गए हैं। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर अन्य सुविधाओं की स्थिति कैसी होगी।
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अमर उजाला की टीम ने गांव सेहलंग, पाथेड़ा, अघिहार एवं गाहड़ा आदि गांवों की पड़ताल की। इस दौरान वहां पर एक भी मरीज नहीं मिला। जब इस बारे में ग्रामीणों से बात की तो पता चला की इन केंद्रों में किसी प्रकार की सुविधा नहीं होने से वे अपने घर पर ही आइसोलेट होना पसंद करते हैं। जबकि गाहड़ा, पाथेड़ा एवं धनौंदा में अभी भी कुल 41 केस एक्टिव हैं।
गांव सेहलंग में फर्श पर बिछा रखे थे गद्दे
गांव सेहलांग के सरकारी स्कूल में बने आइसोलेशन केंद्र में एक ही कमरे में महिलाओं में पुरुषों के लिए दरी बिछाकर उन पर गद्दे रखे हुए थे। एक ही कमरे में 7 गद्दे बिछाए हुए हैं। गांव का कोई भी संक्रमित या संभावित इस आइसोलेशन केंद्र पर एडमिट नहीं था। डॉक्टर व नर्स बीच-बीच में एक-दो बार आते हैं। स्वास्थ विभाग की टीम जब भी आती है तो 8 से 3 बजे तक रहती है। महेश कुमार ने बताया कि स्कूल की तरफ से सैनिटाइजर व मास्क रखे हुए हैं। फिलहाल इस केंद्र पर एक भी कोविड संक्रमित नहीं है।
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पाथेड़ा आइसोलेशन वार्ड की थी यह स्थिति
गांव पाथेड़ा में लगभग 19 मरीज एक्टिव हैं। 140 से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं। यह गांव हॉटस्पाट बना हुआ था। जब टीम सरकारी स्कूल में बने केंद्र में पहुंची तो स्कूल को बाहर से बंद किया हुआ था। वहां पर न तो कोई चौकीदार है और न ही कोई सफाई कर्मचारी है। धनौंदा और गाहड़ा गांव में 24 और 8 मरीज एक्टिव हैं। परंतु वहां भी सुविधा के अभाव में मरीज एडमिट नहीं हो रहे। गाहड़ा में तो आइसोलेशन केंद्र पर ताला लगा हुआ था।
ये सुविधाएं होनी चाहिए आइसोलेशन केंद्र पर
प्रत्येक आइसोलेशन केंद्र में 10 से 20 बेड लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इनमें से आधे बेड महिलाओं और आधे बेड पुरुषों के लिए रखे गए हैं। इन बेड पर बिछाने के लिए चद्दर, केंद्र पर शौचालय, पेयजल, बिजली आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा हर केंद्र पर चौकीदार या फिर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है जो साफ सफाई व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगे।
एक केंद्र का खर्च 30 हजार रुपये
एक ग्राम पंचायत आइसोलेशन केंद्र बनाने में 30 हजार रुपये तक अधिकतम खर्च कर सकती है। इसमें मरीज को बेड, गद्दे, चद्दर, पंखे, खाना, दवाई, सैनिटाइजर, मास्क इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध करवानी होती है।
अगर कोई मरीज भर्ती होता है तो उसको सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। एक ग्राम सचिव के पास तीन से चार गांव या इससे अधिक भी होते हैं तो ग्राम सचिव सभी गांव पर निगरानी रखता है इसलिए एक जगह आइसोलेशन केंद्र पर ग्राम सचिव नहीं बैठ सकता। इसमें कुछ जिम्मेदारियां गांव के सरपंच, नंबरदार को भी सौंपी गई है।
-अरविंद कुमार, एआईपीओ
आइसोलेशन केंद्र ऐसे कोरोना संक्रमित लोगों के लिए बनाए गए हैं। जिनके पास घर में आइसोलेट होने की जगह नहीं है। हालांकि अभी तक कोई भी मरीज इन केंद्रों पर नहीं आया है। अगर कोई आएगा तो उसकी पूरी देखरेख के लिए प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं पूरी की हुई हैं।
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-दिनेश कुमार, एसडीएम
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