संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने महेंद्रगढ़ जिले के मुसनौता स्थित मेसर्स मां संतोषी खनिज उद्योग के खिलाफ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि कंपनी ने अरावली प्लांटेशन क्षेत्र से बिना वन स्वीकृति के कच्चा रास्ता बनाकर अपनी खदान तक भारी वाहनों का संचालन किया। एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति की जांच में सामने आया कि कंपनी पांचनोता गांव के खसरा नंबर 258 और 270 से होकर गुजरने वाले कच्चे रास्ते का उपयोग कर रही थी।
यह क्षेत्र अरावली प्लांटेशन का हिस्सा है, जबकि इसके लिए आवश्यक वन स्वीकृति नहीं ली गई थी। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी ने पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी) की कई शर्तों का पालन नहीं किया। सुरक्षा क्षेत्र विकसित नहीं किया गया, पौधरोपण नहीं हुआ और धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए।
ट्रिब्यूनल ने कंपनी का यह दावा भी खारिज कर दिया कि रास्ता पहले से मौजूद था। एनजीटी ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में ऐसे किसी रास्ते का उल्लेख नहीं है। आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के एमसी मेहता मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि अरावली प्लांटेशन क्षेत्र में बिना अनुमति खनन या उससे संबंधित गतिविधियां नहीं की जा सकतीं। एसईआईएए हरियाणा को तीन माह के भीतर पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के उल्लंघन पर निर्णय लेने, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने तथा सक्षम वन प्राधिकारी को वन (संरक्षण) अधिनियम के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।