फोटो संख्या:71- गांव पाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पूजन करती महिलाएं-स्रोत--आयोजक
महेंद्रगढ़। गांव पाल में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को सुखदेव जन्म व नारद-व्यास संवाद की कथा सुनाई गई। कथा में मुख्य यजमान शर्मिला देवी, अनिल कुमार सोनी रहे। कथावाचक कुलदीप ने बताया कि कलियुग में श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है।
कल्पवृक्ष मात्र अर्थ, धर्म और काम ही दे सकता है, मुक्ति और भक्ति नहीं दे सकता है। लेकिन श्रीमद्भागवत तो दिव्य कल्पतरु है। यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। कलियुग में श्रीमद्भागवत महापुराण श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल पुस्तक नहीं साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप है। इसके एक-एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाएं हुए हैं। कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मों से बढ़कर है। शुकदेव महाराज ने जन्म लेते ही संसार के मार्ग को छोड़ कर और वैराग्य को अपना लिया था। क्योंकि संसार समुद्र की तरह शांत है लेकिन इसमें झंझट बहुत होते है।
इसलिए सुखदेव ने कहा कि संसार रूपी समुद्र में रहकर कमल रूपी भंवरा बनना अच्छा है जो कीचड़ में रहते हुए भी मदमस्त रहता है। इस मौके पर कप्तान शिवकुमार, कुलदीप, ओमप्रकाश, रमेश, सूबेसिंह, उधमसिंह, बद्री प्रसाद, अमर सिंह, छोटू नंबरदार, पूर्व सरपंच सुमेर सिंह, सीताराम सोनी मौजूद रहे।