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नारनौल डिपो को पांच दिन में 50 लाख रुपये का घाटा

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नारनौल। लॉकडाउन के चलते बंद हुई रोडवेज बसों के कारण नारनौल डिपो का घाटा प्रतिदिन 9 से 10 लाख रुपए हो रहा है। सभी मुख्यमार्गों पर न के बराबर बसें चल रही हैं। ग्रामीण बस सेवा पूरी तरह से बंद है। केवल आधा दर्जन गांवों में बसें जा रही हैं वह भी 25 सवारी होने पर। किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली बसें एकदम से बंद हैं।
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नारनौल रोडवेज डिपो में इस समय 131 बसें हैं। लॉकडाउन से पहले सबसे अधिक बसें दिल्ली, रेवाड़ी, जयपुर व अलवर की तरफ चलती थी। इन्हीं रूटों पर डिपो को सबसे अधिक कमाई होती थी। इसके अलावा महेंद्रगढ़, चरखी दादरी भी मुख्य रूटों में शामिल थे। अब इन रूटों पर प्रतिदिन केवल दो से तीन बसें ही निकल रही हैं।
वीरवार को डिपो की कमाई केवल दो लाख रुपये रही। लॉकडाउन से पहले प्रतिदिन की कमाई दस से 12 लाख रुपए के बीच रहती थी। यानि के लॉकडाउन के पांच दिनों में डिपो को करीब 50 लाख रुपये का घाटा हो चुका है।
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नहीं जा रही गांवों में भी बसें
डिपो के अधिकारियों के अनुसार नारनौल से ग्रामीण सेवा भी लगभग बंद सी ही हैं। पहले नांगल चौधरी, अटेली, सिंघाना, निजामपुर, खेतड़ी, नांगल दर्गु, धोलेड़ा, चिंडालिया, छापड़ा सहित अनेक गांवों में बसों की सर्विस रहती थी। अब इन गांवों की ओर केवल 25 सवारियों की बुकिंग के बाद ही बस को रवाना किया जा रहा है।
दिल्ली व गुरुग्राम के लिए अब भी रहती है भीड़
दिल्ली व गुरुग्राम के लिए नारनौल से जाने वालों की भीड़ लॉकडाउन में सबसे अधिक रहती है। नारनौल डिपो की केवल तीन से चार बसों को ही इन रूटों पर प्रतिदिन निकाला जा रहा है। दूसरे स्थानों से आने वाली बसों में ही बुकिंग कर यहां से सवारियों को दिल्ली, गुरुग्राम व रेवाड़ी भेजा जा रहा है।
अब तक डिपो को 50 लाख रुपये के आस पास घाटा हो चुका है। महत्वपूर्ण मार्गों पर बसों की संख्या न के बराबर भेजी जा रही हैं। दिल्ली, रेवाड़ी व जयपुर की ओर जाने वाली बसों से सबसे अधिक कमाई होती थी। लेकिन अब इन रूटों पर केवल प्रतिदिन दो से तीन बसें ही चल रही हैं। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी तब अधिकारियों से विचार विमर्श कर बसों की संख्या को बढ़ाया जाएगा।
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-जयकिशन, बस अड्डा इंचार्ज, नारनौल।
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