नारनौल शहर में हुई पहली मानसूनी बारिश ने जिला प्रशासन के उन दावों की पोल खोल कर दी रखी जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि शहर में कहीं भी जलभराव नहीं होगा। मगर यहां हुई मात्र 23 एमएम बारिश ने शहर के हालात बदतर कर दिए है। एक तरफ से इस बारिश से लोगों को परेशानी हुई, वहीं बारिश ने लोगों को काफी दिनों से पड़ रही गर्मी से निजात भी दिलाई। इस बारिश के बाद से किसानों के चेहरे भी खुशी से खिल उठे हैं। कृषि वैज्ञानिकों की मानें, तो इस बारिश से फसलों को काफी फायदा होगा। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला पहले ही जिला प्रशासन को इस बारे में चेता चुका था कि जलनिकासी के प्रबंध पुख्ता नहीं है और मानसून में शहरवासियों को जलभराव की समस्या से दो चार होना पड़ेगा।
इन क्षेत्रों में हुआ जलभराव
पहली बरसात में शहर के जिन स्थानों पर पानी भर गया उनमें सैन चौक, नई मंडी, महेंद्रगढ़ रोड, सुभाष स्टेडियम, नलापुर, जमालपुर, शिवनगर, पुरानी कचहरी के पास तथा लोकनिर्माण विभाग के विश्राम गृह के सामने मुख्य मार्गों पर एक से चार फुट पानी भर गया। इस पानी से महिलाओं तथा बच्चों को निकलना कठिन हो गया तथा वाहनों को निकलना भी आसान नहीं रहा। इसके अलावा नई मंडी में पानी भर गया। जिससे व्यापारियों को परेशानी हुई। व्यापारी अजीत सिंह, विक्रम सिंह, राजपाल, सुखराम सैनी, बलजीत, राजेश, विजय सिंह, लाल सिंह, प्रदीप व सतीश आदि ने बताया कि यहां पर नालियों की सही सफाई नहीं होती। जिसके कारण यहां अकसर पानी भरने की समस्या रहती है। हल्की सी बरसात के बाद ही यहां पर पानी जमा हो जाता है। जिससे व्यापारियों को काफी परेशानी होती है।
रुक-रुक कर होती रही बरसात
पहले ही दिन 24 घंटे में 23 एमएम बरसात हुई है। यह बरसात केवल शहर में ही नहीं बल्कि गांवों में भी ऐसी ही बरसात हुई है। शुक्रवार की रात से शनिवार की सुबह तक रुक-रुककर बरसात होती रही। यह बरसात शनिवार की दोपहर तक होती रही। शनिवार की दोपहर के बाद आसमान में बादल तो छाए रहे लेकिन बरसात रुकी हुई है।
फसलों को मिला जीवनदान
किसानों के चेहरे खिले-लगभग दो सप्ताह पूर्व पूर्व मानसून के दौरान किसानों ने अपनी बाजरे तथा ग्वार की फसलों की बिजाई कर दी थी। उसके बाद किसानों की उक्त फसलें सूखने लगी थी। इस बरसात ने उक्त फसलों को न केवल नया जीवनदान दिया है बल्कि उक्त फसलें अब लहलहाने लगी हैं। उक्त फसलें अगेती फसलें हैं तथा इनकी पैदावार भी अच्छी होने की संभावनाएं प्रबल दिखाई दे रही हैं।
पेयजल की समस्या भी कम हुई
बरसात से पूर्व नहरी पानी पर आधारित पेयजल योजनाएं नाकाफी होने लगी थी तथा नहरों में पानी नहीं आने के कारण पेयजल संकट बढ़ने लगा था तथा नांगल चौधरी तथा निजामपुर जैसे क्षेत्रों के अधिकांश गांवों में पेयजल की समस्याएं गंभीर होने लगी थी। अब इस बरसात के बाद पेयजल की समस्या काफी कम हो गई है।