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भारती नगर परिषद प्रधान तो मनोज उपप्रधान

Sun, 03 Jul 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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नारनौल में सांसद और विधायक गुट ने रविवार को सर्वसहमति से भारती सैनी को नगर परिषद नारनौल का प्रधान चुन लिया लेकिन उपप्रधान पद के लिए यह फार्मूला सफल नहीं हो पाया। उपप्रधान पद के लिए तीन दावेदार मैदान में उतर आए। काफी गहमागहमी के बाद विधायक गुट के अलावा मैदान में दो दावेदारों में से एक ने दूसरे के पक्ष में मैदान छोड़ दिया। अंत में विधायक गुट के प्रत्याशी मनोज जांगड़ा को 17 वोट मिले। सांसद धर्मवीर गुट समर्थित वार्ड नंबर-दो की पार्षद भारती सैनी और विधायक ओमप्रकाश गुट समर्थित वार्ड नंबर-22 के पार्षद मनोज जांगड़ा के समर्थकों ने विजय जुलूस निकालकर आतिशबाजी कर अबीर-गुलाल की होली खेली। उपप्रधान के चुनाव में वार्ड नंबर-24 के पार्षद सुरेंद्र लेफ्टी को केवल नौ वोट मिले। चुनाव के मद्देनजर पंचायत भवन में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस फोर्स तैनात थी।  
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22 मई को नगर परिषद चुनाव के बाद से प्रधान और उपप्रधान को लेकर काफी खींचतान चल रही थी। इस बार प्रधान बीसी श्रेणी से बनना था। इस कारण मुख्य रूप से पहले तीन नाम और बाद में दो ही नाम सामने आने लगे। इनमें एक गुट भ्रष्टाचार का विरोध कर विधायक ओमप्रकाश एडीओ की शरण में चला गया था। इसमें शहर के पुराने कई दिग्गज पार्षद और उनके प्रतिनिधि भी थे। इन लोगों ने प्रमोद तरेडिया को प्रधान पद के लिए अपना उम्मीदवार मान लिया था। भारती सैनी गुट के लोग सांसद धर्मवीर की शरण में चले गए थे। उन्होंने प्रमोद तरेडिया को कांग्रेसी बताकर उसका जमकर विरोध किया। मामला शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और चौ. बीरेंद्र सिंह तक पहुंच गया। इस कारण 23 जून को घोषित चुनावी बैठक को अचानक स्थगित करना पड़ा। इसी बीच शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, भाजपा सांसद धर्मवीर सिंह और विधायक ओमप्रकाश ने सर्वसहमति बनाने का प्रयास भी किया मगर सफल नहीं रहे। इसके बाद 25 मई को शपथ ग्रहण कराया गया। इसमें केवल दो पार्षदों ने ही शपथ ली। शुक्रवार को प्रशासन ने फिर से तीन जुलाई को चुनाव तारीख की घोषणा की। इसके बाद दो जुलाई को सांसद और विधायक के बीच सर्वसहमति बनी और भारती सैनी को प्रधान पद का दावेदार घोषित कर दिया गया।

चुनाव से पहले सांसद और विधायक पहुंचे रेस्ट हाउस
रविवार को 11 बजे पंचायत भवन में चुनाव बैठक होनी थी। इस कारण विधायक ओमप्रकाश एडीओ सुबह दस बजे ही पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंच गए। वहां विधायक गुट के 10 पार्षद पहले से मौजूद थे। यहां पर 10 पार्षद विधायक के साथ होने से एक बार दूसरे खेमे में हलचल मच गई। इसके बाद करीब पौने 11 बजे सांसद रेस्ट हाउस पहुंचे। उन्होंने विधायक और दो-तीन वरिष्ठ पार्षदों के साथ गुप्त बैठक की। इसके बाद बाहर आकर पत्रकारों को भारती सैनी को सर्वसहमति से प्रधान पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। उपप्रधान पद के लिए पंचायत भवन में विधायक द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने की बात कही गई। भारती सैनी के नेतृत्व में 15 पार्षदों ने पंचायत भवन पहुंचकर हाजिरी लगाई। विधायक और सांसद भी 12 बजे पंचायत भवन पहुंच गए थे। इनके साथ अन्य दस पार्षद भी पंचायत भवन पहुंचे। यहां पर सबसे पहले शपथ ली गई।
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शपथ के बाद हुआ चुनाव
चुनाव अधिकारी सीटीएम कैप्टन मनोज खत्री ने सभी पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण करने के बाद चुनाव हुए। इसमें सांसद ने भारती सैनी का नाम प्रधान पद के लिए रखा। इसका प्रमोद तरेडिया ने अनुमोदन किया। सभी पार्षदों ने मेज थपथपाकर भारती सैनी का स्वागत किया और उनको सर्वसहमति से प्रधान चुन लिया गया।

उपप्रधान के लिए हुआ गहमागहमी
सर्वसहमति से प्रधान चुने जाने के बाद उपप्रधान पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें विधायक की तरफ से मनोज जांगड़ा का नाम रखा गया। इस पर विधायक ने सर्वसहमति बनाने का प्रयास किया, मगर नहीं बन पाई। दूसरे गुट से सुरेंद्र लेफ्टी और कपिल यादव ने भी नामांकन भर दिया। इस पर सांसद ने चुनाव प्रक्रिया के बीच में ही भारती सैनी के पति संजय सैनी को बुलाया और सर्वसहमति बनाने के लिए लेफ्टी और कपिल का नामांकन वापस लेने की बात कही। संजय सैनी बिना कुछ कहे वहां से चले गए। इसके बाद कपिल यादव ने सुरेंद्र लेफ्टी के पक्ष में अपना नामांकन वापस ले लिया। मनोज जांगड़ा और सुरेंद्र लेफ्टी के बीच मुकाबला हुआ। इसमें मनोज जांगड़ा को 17 और सुरेंद्र को 9 वोट मिले। उपप्रधान पद के लिए विधायक ओमप्रकाश ने भी अपने मत का प्रयोग किया। इस प्रकार उपप्रधान पद के लिए 26 वोट डले।

फैसला आने से पहले ही सांसद, विधायक चले गए
उपप्रधान का फैसला आने से पूर्व ही सांसद धर्मवीर और विधायक ओमप्रकाश उठ कर चल दिए। सांसद और विधायक ने बताया कि वे प्रधान के लिए सर्वसहमति बनाने में कामयाब रहे मगर उपप्रधान में ऐसा नहीं हो पाया। इस कारण चर्चाएं यह भी रही कि दोनों ही नाराज होकर गए हैं।

दोनों ने निकाला विजय जुलूस
परिणाम घोषित होने के बाद विजेता प्रधान और उपप्रधान गुटों ने विजय जुलूस निकाला। विजय जुलूस पंचायत भवन से शुरू होकर पूरे शहर में गया। जमकर आतिशबाजी के साथ रंग और गुलाल की
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