सर्दी की शुरूआत हो चुकी है। पिछले तीन-चार दिनों से क्षेत्र में स्मॉग भी देखने को मिल रहा है। वाहन चालकों के लिए यह स्मॉग मुसीबत बना हुआ है। उधर हर वर्ष की तरफ इस दफा भी लोक निर्माण विभाग ने धुंध और कोहरे को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं किए है। जिला में कई किलोमीटर लंबे नेशनल व स्टेट हाइवे हैं। मगर कुछ एक स्थानों को छोड़कर कहीं भी सांकेतिक निशान नहीं लगाए गए हैं। ऐेसे में आने वाला सर्दी का समय वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा रहने वाला है।
पिछले दो-तीन वर्षों से क्षेत्र में सर्दी के मौसम में जबरदस्त धुंध पड़ती है। जिसमें विजिबिल्टी भी बहुत कम होती है। ऐसे मौसम में वाहन चालक सड़क पर सांकेतिक निशानों के सहारे ही वाहन चलाता है, लेकिन जिला की अधिकांश सड़कों, मोड़ों तथा अन्य दुर्घटना संभावित स्थानों पर संकेतक नदारत हैं। जहां कहीं संकेतक लगे हुए भी थे, वे टूट चुके हैं, या उन पर कोई पोस्टर आदि लग गया है। ऐसे में कोहरे के मौसम में बिना सांकेतिक निशान के वाहन चलाना बहुत ही मुश्किल होगा। वहीं चालक को अपने वाहन को धुंध में बड़ी सूझबूझ के साथ चलाना होगा।
सड़कों की नहीं हुई मरम्मत
क्षेत्र की अधिकांश सड़के काफी समय से टूटी पड़ी है। जिनकी अभी तक मरम्मत भी नहीं हो पाई है। नारनौल शहर की भी अधिकांश सड़कों में गहरे-गहरे गड्ढे हो गए है। जिस कारण शहर की सड़कों पर हमेशा धूल के गुब्बारे उड़ते है। टूटी सड़कों पर पीली पट्टी या सफेद पट्टी बनना बेमानी सी लगती है। नारनौल से होकर गुजर रहा नेशनल हाइवे भी पूरी तरह टूट गया है। जिससे उसके संकेतक भी गायब हैं।
जिले से दो नेशनल हाइवे गुजरते
जिला महेंद्रगढ से नेशनल हाइवे नंबर-11 रेवाडी-नारनौल से सिंघाणा तक है। जिसकी कुल लंबाई 41 किलोमीटर की है। इसी प्रकार नेशनल हाइवे नंबर-148बी रायमलिकपुर-नांगल चौधरी-नारनौल-महेंद्रगढ-दादारी से भिवानी तक जाता है। जिसकी कुल लंबाई 79 किलोमीटर की है, दोनों ही नेशनल हाइवे पर एक-दो जगह को छोड़कर कही भी सांकेतिक निशान नहीं लगवाए गए हैं और न ही सड़क दोनों ओर होने वाली पीले रंग की पट्टी बनाई गई है।
जिले में है तीन स्टेट हाइवे
महेंद्रगढ़ जिले में नेशनल हाइवे के साथ ही तीन स्टेट हाइवे भी गुजरते है। जिनकी कुल लंबाई 68 किलोमीटर के लगभग है। इसमें 15 किलोमीटर लंबा स्टेट हाइवे-17 निजामपुर से नारनौल तक है। वहीं स्टेट हाइवे-24 जोकि 48 किलोमीटर लंबा कनीना-सतनाली से लोहारू तक जाता है। इसके अलावा 5 किलोमीटर लंबा स्टेट हाइवे-22 जोकि कनीना से कोसली तक जाता है।
अप्रोच रोड़ों का बुरा हाल
नेशनल व स्टेट हाइवे के अलावा अप्रोच रोडों का भी बुरा हाल है। जिला में अनेक अप्रोच रोड हैं, जो सालों से टूटे हुए हैं। इन रोडों पर संकेतक तो बहुत दूर की बात रोडों से रोड़ी ही नदारत हैं। जिससे हादसों की संभावना ज्यादा बनी हुई है।
सफेद व पीली पट्टी करती है काफी मदद
सड़कों पर बनी सफेद व पिली पट्टïी वाहन चालकों की धुंध व कोहरे के मौसम में काफी मदद करती है। मगर जिला में केवल नेशनल हाइवे पर ही सफेद पट्टी बनी हुई है। वह भी कई जगह गायब है, स्टेट हाइवे की बात की जाए तो यहां सफेद पट्टी कहीं नहीं है। वहीं पीली पट्टी का पूरे जिले में कहीं नाम नहीं है।
बाईपास सबसे खतरनाक, नहीं संकेतक
नारनौल में दो साल पूर्व बना बाईपास बहुत ही खतरनाक है। यहां पर कहीं भी कोई संकेतक नहीं लगा हुआ। मोड़ काफी घुमावदार हैं। ऐसे में यहां अनेक हादसे हो चुके हैं।
जिला की सड़कों पर संकेतक व सफेद पट्टïी बने हुए हुए हैं। जहां कहीं संकेतक नहीं है, वहां बना दिए जाएंगे। वहीं सफेद पट्टïी भी बनाई जाएगी।---सज्जन सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी।