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किसानों को झटका, फ्लोराइड ने उत्पादन गटका

Tue, 30 Aug 2016 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल इमेज - फोटो : मोहम्मद सैफ अली खान (अमर उजाला)
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नारनौल के नांगल चौधरी में पेयजल में निर्धारित मात्रा से अधिक फ्लोराइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, लेकिन लगातार जल स्तर गिरने के कारण फ्लोराइड की मात्रा करीब 7 पीपीएम तक पहुंच गई। मिट्टी-पानी की विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक नांगल चौधरी ब्लाक का भूजल बागवानी फसल के लिए उपयुक्त नहीं है। इससे कृषि पर आधारित किसानों की चिंता बढ़नी शुरू हो गई।

नांगल चौधरी ब्लाक में 1500 फीट तक भूजल स्तर नहीं मिल रहा है। इसके चलते सरकार ने पेयजल समस्या  उत्पन्न होने पर खंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया है। जिसमें निजी बोरवेल लगवाने पर पाबंदी लगा दी गई ताकि गिरते जल स्तर को रोका जा सके। अधिकतर  किसान परंपरागत फसल उगाते हैं। जिसमें लागत व पानी खर्चा अधिक होने के कारण  खेतीबाड़ी व्यवसाय घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसलिए सरकार ने फल व  फूलों की खेती को बढ़ावा देने की योजना बना दी। विभाग का तर्क है कि  बागवानी फसल की मार्केटिंग में किसानों को सुविधा रहेगी, दूसरी ओर उन्हें  परंपरागत खेती की अपेक्षा अधिक मुनाफा मिलेगा। इस फसल के लिए महेंद्रगढ़  जिला उपयुक्त माना गया है। योजना को आमजन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने खंड  स्तर पर बागवानी अधिकारी नियुक्त रखे हैं। जिन्हें गांव-गांव जाकर किसानों  को उद्यान खेती के लिए प्रेरित करना होगा। फसल के प्रचार में सरकार ने भी  विशेष भूमिका निभाते हुए बागवानी की विभिन्न फसलों पर 57 से 65  प्रतिशत  अनुदान देने की व्यवस्था की है, लेकिन अधिक गहराई के भूजल में ईजी, आरएससी,  फ्लोराइड की मात्रा बढ़ गई। जिससे सिंचाई करने पर पौधा पीला होकर सूखने का  खतरा रहता है। परंपरागत फसलों की सिंचाई के लिए बोरवेलों में पर्याप्त  भूजल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों को बेरोजगार होने की चिंता सताने लगी  है।
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ब्लाक के 24 एकड़ रकबे पर बागवानी
महेंद्रगढ़ जिले में 750  एकड़ रकबे पर विभिन्न बागवानी फसल खड़ी है। नांगल चौधरी ब्लाक में केवल 24  एकड़ बागवानी फसल है। जबकि ब्लाक के विभिन्न गांवों में 40 हजार एकड़ जमीन  पर बिजाई नहीं होती है। बागवानी फसल को लेकर अटेली खंड के किसान सर्वाधिक  जागरूक हैं।

पिछले साल नहीं हुआ टारगेट पूरा
बाग        टारगेट  (एकड़)   अचीव
अमरूद       7.04            2.06
किन्नू          125             93
अनार         2.04           .07

उन्नत किस्म के पौधे नहीं मिलते
बागवानी  पौधे किसानों को स्वयं खरीदने होंगे। जिनकी उन्हें जानकारी नहीं होती,  विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रेरित करने पर निजी नर्सरी से पौधे खरीदते  हैं। मांदी निवासी पीड़ित किसान भूपसिंह यादव ने बताया कि 1995 में बागवानी  फसल उगाई गई थी, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते पूरा बाग बिना उत्पादन  दिए नष्ट हो गया। इसी गांव के दूसरे किसान ने आंवले का बाग लगाया था।  जिसमें फल नहीं आने के कारण उखाड़ दिया गया। इसके बाद दूसरी नर्सरी से  आंवले के पौधे खरीदकर लगाए गए हैं। जिनसे किसान को उत्पादन मिलना आरंभ हो  गया।

प्रमाणित संस्थान से पौधे खरीदें
विभागीय जल व मृदा जांच  रिपोर्ट के मुताबिक किसान नींबू, किन्नू, आंवला, अमरूद, मौसमी व बेरी आदि  बागवानी फसल उगा सकते हैं। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा प्रमाणित  संस्थान से पौधे खरीदने पर अनुदान की सुविधा मिलेगी। पौधरोपण, बीमारी व  मौसम संबंधित जानकारी विभाग द्वारा निशुल्क मुहैया करवाने का प्रावधान है।

अंधाधुंध जल दोहन से बढ़ा संकट
जानकारी  के मुताबिक नांगल चौधरी ब्लाक की कृष्णावती नदी में करीब 10 साल बजरी  वाशिंग प्लांट चले हैं। अंधाधुंध जल दोहन होने के कारण भूजल स्तर करीब 250  से 1500 फीट तक पहुंच गया। गहराई के पानी में विषैली गैस तथा हानिकारक  तत्वों की मात्रा बढ़ गई। जोकि स्वास्थ्य व खेतीबाड़ी के लिए घातक साबित हो  रही है।

नहरी पानी ही विकल्प
विभागीय सूत्रों की माने तो बोरवेलों  का पानी बागवानी फसल की सिंचाई योग्य नहीं है। जिससे सरकार द्वारा  क्रियान्वित कम पानी में पकने वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना दम तोडने  लगी है। समाधान के लिए किसानों को नहरी पानी मुहैया करवाना होगा। जिसमें  हानिकारक तत्व नहीं होते है।
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किसान चाहते हैं बाग लगाना, फ्लोराइड बाधा
जिला  उद्यान अधिकारी डा. मनजीत यादव ने बताया कि नांगल चौधरी ब्लाक में पानी की  रिपोर्ट खराब होने के कारण बागवानी फसल की अनुमति नहीं देते, क्योंकि  लाखों खर्च करने के बावजूद बाग सूखने की समस्या रहती है। इस साल 17 एकड़  रकबे पर अमरूद, 40 एकड़ पर किन्नू फसल का टारगेट मिला है। 5088 अमरूद तथा  3840 किन्नू की फसल पर प्रति एकड़ आर्थिक सहायता मिलेगी। निर्धारित  मापदंडानुसार तीन साल तक आर्थिक मदद मिलेगी।
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