नारनौल में दीपावली की रात पुरानी कचहरी के पास स्थित एक दुकान में शार्ट सर्किट के चलते आग लग गई। दुकान में लगी आग ने अपने साइड की दो अन्य दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि ढाई घंटे के प्रयास के बाद तीन दमकल व दो पानी के टैंकरों से आग पर काबू पाया गया। इस घटना में व्यापारियों को 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सोमवार सुबह पीड़ित दुकानदारों ने इस बारे में उपायुक्त से भी मुलाकात कर मुआवजे की मांग की।
महावीर मार्ग स्थित पुराने डा. विजय के अस्पताल में एक ही हाल में लकड़ी के पार्टिशियन बनाकर तीन दुकानें बनाई हुई हैं। इन दुकानों को अलग-अलग व्यापारियों को डा. विजय ने किराए पर दिया हुआ है। इनमें एक दुकान नीरु सेल्स एजेंसी के नाम से जूता चप्पल, रोहिल्ला गारमेंट व बालाजी गारमेंट के नाम से हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात को करीब आठ बजकर 40 मिनट पर पुरानी सराय के मोहल्ले के युवाओं ने एक दुकान नीरू सेल्स एजेंसी के शटर के नीचे से धुआं निकलता देखा। युवाओं ने इस बारे में अन्य को बताया तो उन्हें समझने में देर नहीं लगी की दुकान में आग लगी हैै। इस पर लोगों ने तुरंत फायर बिग्रेड, पुलिस व दुकान मालिकों को फोन किया। करीब दस मिनट बाद मौके पर फायर बिग्रेड की गाड़ी पहुंच गई, मगर बिजली आपूर्ति नहीं काटने की वजह से शटर आदि में करंट आने लगा। इस पर लोगों ने बिजली निगम को फोन कर लाइट को कटवाया। इसके बाद लोगों ने अपने साधनों के अलावा फायर बिग्रेड ने आग पर काबू पाना शुरू किया। लोगों ने दुकान के शटर आदि तोड़ दिए। वहीं आसपास के दुकानों के लगे तिरपाल आदि को भी हटा दिया, ताकि आग नहीं फैले।
जल्दी से नहीं पाया गया काबू, किया लोगों ने खूब प्रयास
एक दुकान में कास्मेटिक का सामान भी रखा हुआ था। वहीं लकड़ी का ज्यादा फर्नीचर व कपड़े आदि होने के कारण आग तेजी से फैलती जा रही थी। इसके कारण लोगों के अथक प्रयासों के बावजूद भी आग पर जल्दी से काबू नहीं पाया गया। इसके कारण दूसरी दमकल की गाड़ी बुलानी पड़ी।
तीन गाड़ियां व दो टैंकरों ने पाया काबू
एक दमकल से आग काबू नहीं आई तो नारनौल स्थित तीनों दमकलों को मौके पर बुला लिया गया। जिसके बाद भी आग पर काबू पाने में सारा पानी खर्च हो गया तो मौके पर दो पानी के टैंकर भी बुलाये गए। जिनके द्वारा पानी डाला गया। इसके बाद ही करीब 11 बजे आग पर पूर्ण रूप से काबू पाया जा सका।
बाल-बाल बची, पास की दो दुकानें
डा. विजय सिंह के पुराने अस्पताल में जहां ये दुकानें स्थित थी, उसके पास ही एक साइड में रेडीमेड व दूसरी साइड में दवाईयों की दुकान भी स्थित थी। मगर इनके बीच में दीवार होने के कारण आग केवल तीन दुकानों तक ही फैली तथा दोनों दुकानों का बचाव हो गया। हालांकि दोनों दुकानों के मालिक भी मौके पर पहुंच गए थे तथा रेडीमेड की दुकान से सामान भी बाहर निकाल दिया गया था। वहीं साथ लगे तीरपालों को भी हटा दिया गया था। जिसके कारण ये दोनों दुकान बाल-बाल बची।
लकड़ी के पार्टिशन के कारण लगी तीनों में आग
ये तीनों दुकान एक बड़े हाल में लकड़ी के पार्टिशन कर बनाई गई थी। तीनों के शटर अलग-अलग थे। सबसे पहले लोगों ने नीरु सेल्स एजेंसी की दुकान से धुआं उठता देखा था। इसलिए अनुमान यही लगाया जा रहा है कि आग नीरु सेल्स एजेंसी में ही पहले लगी थी। इसके बाद दुकान में रखी बैटरी भी फटी है। साइड की दोनों दुकानों में लकड़ी का पार्टिशन होने के कारण आग ने जल्दी दोनों दुकानों को चपेटे में ले लिया था, यदि यहां बीच में ईंटों की दीवार होती तो दो दुकानें बच सकती थी।
किसी ने नहीं लगाया था फायर सेफ्टी यंत्र, एक ने कराया हुआ है बीमा
तीनों दुकानों में से किसी के पास भी फायर सेफ्टी यंत्र भी नहीं लगा हुआ था। वहीं केवल एक दुकानदार ने ही एक बीमा कंपनी से दुकान का बीमा कराया हुआ है। जबकि दो दुकानदारों ने किसी भी प्रकार का बीमा नहीं कराया हुआ।
ये हुआ नुकसान
तीनों दुकान मालिकों की माने तो तीनों दुकानदारों को करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। पीड़ित रोहिल्ला गारमेंट के राजेंद्र वर्मा के अनुसार उनकी दुकान में 15 लाख रुपये, नीरु सेल्स के राजेश कुमार के अनुसार उसकी दुकान में 15 से 20 लाख रुपये तथा बालाजी रेडीमेड के संचालक सतीश के अनुसार उसकी दुकान में भी करीब 15 से 20 लाख रुपये का सामान था।
डीसी से मिले व्यापार मंडल के सदस्य
रविवार को हुई घटना के बाद सोमवार को सुबह हरियाणा व्यापार मंडल के पदाधिकारी जिला प्रधान बजरंगलाल अग्रवाल की अध्यक्षता में उपायुक्त राजनारायण कौशिक से भी मिले। उन्होंने उपायुक्त को एक ज्ञापन भी दिया। जिसमें पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। इस मौके पर उनके साथ तीनों दुकानदारों के अलावा सुदर्शन बंसल, संजय गर्ग, सीताराम सर्राफ, प्रकाश सोनी, भगवानदास भगत जी, विजय अग्रवाल, ओमप्रकाश तायल व मुकेश मित्तल आदि थे।