नगर परिषद के प्रधान और उपप्रधान के चुनाव में अब विधायक ओमप्रकाश एडीओ के अलावा भाजपा के अनेक नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। नप प्रधान व उपप्रधान पद के लिए दो गुट बने हुए हैं। जिनमें एक विधायक समर्थक और दूसरा अन्य गुट है। दोनों ही गुटों के पास पर्याप्त बहुमत बताया जा रहा है, मगर गुटबाजी व पार्टी बाजी के कारण दोनों ही गुट भाजपा के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच गए हैं। इसके कारण बुधवार को होने वाला चुनाव टल गया था। अब दोनों ही गुट अपनी-अपनी जुगत बैठाने के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं के चक्कर काट रहे हैं।
नारनौल नगर परिषद के प्रधान पद के लिए चुनाव भाजपा पार्टी के गले की फांस बनते जा रहे हैं। प्रधान पद के लिए दो गुट बने हुए हैं। जिनमें एक गुट विधायक समर्थक है। विधायक के कारण गुट को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का भी समर्थन है। वहीं शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भी इसी गुट का प्रधान बनाने की पैरवी की बताई जा रही है। वहीं दूसरा गुट मंगलवार रात को अचानक एमपी धर्मवीर सिंह के पास पहुंच गया। जहां पर उन्होंने पहले गुट के प्रधान पद के उम्मीदवार के बारे में कांग्रेसी होना बताया। इस गुट के लोगों ने एक अन्य कैबिनेट मंत्री से भी संपर्क
किया है। मामला ज्यादा बढ़ने के कारण भाजपा नेताओं को आनन फानन में चुनाव स्थगित करवाना पड़ा। इसका एक कारण दोनों गुटों में कांटे की टक्कर होने की भी बात की जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले गुट ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह से भी मुलाकात की। जिस पर चौ. बीरेंद्र सिंह ने पहले गुट का साथ देने का पूरा आश्वासन दिया बताया जा रहा है। इस प्रकार ये चुनाव अब भाजपा नेताओं के साथ-साथ विधायक की प्रतिष्ठा का सवाल बनते जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सांसद भी विधायक के पक्ष में आ गए हैं। वहीं प्रशासन ने अभी तक नप प्रधान पद के चुनाव के लिए दूसरी तारीख निर्धारित नहीं की है।