नारनौल। जिले की सभी 6 मंडियों में शनिवार से सरसों की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक ई-खरीद पोर्टल पर मंडियों के नाम अपडेट नहीं किए गए हैं।
जब तक पोर्टल पर मंडियों के नाम अपडेट नहीं किए जाते हैं, तब तक गेटपास भी जारी नहीं किए जा सकते हैं। यह तो गनीमत है कि क्षेत्र में अभी सरसों की कटाई का कार्य किया जा रहा है। इस कारण मंडियों में किसान सरसों लेकर नहीं पहुंचे हैं। यदि जल्द पोर्टल पर मंडियों के नाम अपडेट नहीं किए गए तो सरसों बेचने आने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संभावना है कि दो से चार दिन में किसान मंडियों में आने शुरू हो जाएंगे।
किसानों को सरसों में नमी की अधिक मात्रा होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार केवल वही सरसों खरीदी जाएगी, जिसमें नमी की मात्रा 8 प्रतिशत तक होगी। अधिक नमी होने के कारण किसानों को नमी कम होने का इंतजार करना पडे़गा। गत वर्ष भी कई किसान ऐसे थे, जो फसल लाने के करीब दो से तीन दिन तक मंडी में ही रहे। नमी कम होने पर फसल बेच पाए।
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बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य में अंतर 250 रुपये
सरसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य 5650 रुपये निर्धारित किया गया था। अभी सरसों का बाजार भाव 5700 रुपये के पास है। बाजार भाव और सरकारी भाव में केवल 250 रुपये का अंतर है। कम अंतर के कारण मंडियों में सरसों की आवक प्रभावित हो सकती है। पिछले वर्ष सरकारी भाव और बाजार भाव में करीब 600 से 700 रुपये का अंतर था और जिले की सभी मंडियों में सरसों की रिकार्ड आवक दर्ज की गई थी।
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एक बार में 25 क्विंटल सरसों ही बेच सकते हैं किसान
सरकारी भाव पर केवल वही किसान फसल बेच सकते हैं। जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। यदि किसी किसान ने एमएफएमबी पोर्टल पर सरसों की पैदावार का पंजीकरण 25 क्विंटल से ज्यादा या 50 क्विंटल से ज्यादा करवाया है। पैदावार भी 25 क्विंटल और 50 क्विंटल से ज्यादा है। इस स्थिति में किसान को दो से तीन चक्कर में अपनी फसल बेचनी पड़ेगी। क्योंकि एक बार में एक किसान केवल 25 क्विंटल सरसों ही बेच सकता है।
वर्जन :
सरसों की खरीद शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि फसल कटाई के कार्य के बाद कुछ दिनों के दौरान मंडी में सरसों की आवक शुरू हो जाएगी। सरसों में नमी की मात्रा 8 प्रतिशत निर्धारित की गई है। किसानों से अपील है कि पैदावार को अच्छे से सुखाकर लाएं, ताकि नमी की मात्रा अधिक होने पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।-रूबी हुड्डा, मैनेजर, वेयर हाउस।