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प्रॉपर्टी सील करने का अधिकार न होने से टैक्स वसूली में नप बेबस

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आर्थिक संकट से जूूझ रहा नगर परिषद प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में फिसड्डी साबित हो रहा है। नप की नोटिस को भी बकायेदार भी गंभीरता से नहीं लेते। ऐसे लोगों पर नप भी कार्रवाई करने में असमर्थ है क्यों कि उसे प्रॉपर्टी सील करने का अधिकार नहीं है। नप के अनुसार डीसी के आदेश पर ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। हाउस टैक्स की वसूली कम होने से नप को कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। नप का करीब 12 करोड़ रुपये टैक्स का स्कूलों, होटलों व सरकारी भवनों में डीसी कार्यालय समेत अन्य शामिल है।
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बता दें कि नगर परिषद को मुख्य आय हाउस टैक्स से होती है। लेकिन, लोग टैक्स देने में रुचि नहीं दिखाते। ऐसे में नप को कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य कार्यों में परेशानी होती है। नप का कॉमर्शियल और रिहायशी भवनों पर करीब 12 करोड़ रुपये बकाया है।
नप ने बड़े बकायेदारों को अंतिम नोटिस भेज चुका है। इसके बाद भी ऐसे लोगों ने टैक्स जमा नहीं कराया है। बकायेदारों में स्कूल, होटल, मैरिज हॉल, मंदिर में बनी दुकाने, कॉमर्शियल व सरकारी भवन शामिल है। इसमें कुछ ऐसे संस्थान भी जो लंबे समय से टैक्स जमा नहीं कराया हुआ है और लाखों रुपये बकाया है। नप के अनुसार हाल में कुछ सरकारी विभागों ने टैक्स जमा कराया है। छोटे लोग टैक्स जमा करा रहे हैं लेकिन बड़े बकाएदार इसे लेकर गंभीर नहीं है। इससे नप को अपने कर्मचारियों को वेतन देने मेें भी परेशानी हो रही है। नप का हर माह करीब एक करोड़ रुपये का खर्च है।
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विकास कार्य होते हैं प्रभावित
नप विकास कार्यो को लेकर पूरी तरह से सरकार पर निर्भर है। टैक्स कलेक्शन होने से नप को छोटे कार्य स्थानीय स्तर पर कराने में मदद मिलती है। हाउस टैक्स वसूली की गति कमजोर होने से नप को कार्य कराने में परेशानी हो रही है। नप को स्ट्रीट लाइटें व वाहनों की रिपेयर जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए परेशानी होती है। इसका असर साफ-सफाई जैसे कार्यों पर भी पड़ता है।
बड़े बकायेदारों की फाइनल नोटिस भेजी जा चुकी है। प्रॉपर्टी सील करने का अधिकार नप के पास नहीं है। इन पर पर कार्रवाई के लिए डीसी से अनुमति मांगी गई है। इसके बाद ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। नगर परिषद टैक्स वसूली पर ध्यान दे रहा है। नोटिस के बाद कुछ लोगों से टैक्स जमा कराया है।
- अभय सिंह, ईओ नप नारनौल
मेरे पास भी सीधे अधिकार नहीं : डीसी
मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अमर उजाला ने डीसी जगदीश शर्मा से नप के बकायेदारों के बारे में सवाल किया कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। बकायेदारों में सरकारी विभाग भी शामिल हैं। इस पर डीसी ने कहा कि सरकारी संस्थानों पर बकाये पैसे को लेकर संबंधित विभागों से जमा कराने को कहा गया है। इसके लिए सभी ने अपने विभागों से पैसे मांगे हैं। डीसी कार्यालय पर भी पैसे बकाये हैं। इसके लिए भी पैसे सरकार से मांगे गए हैं। जहां तक प्रॉपर्टी सीलिंग की बात है, वास्तव में यह अधिकार मेरे पास भी सीधे नहीं है। नगर निगमों के पास यह निजी प्रॉपर्टी सील करने अधिकार होता है। बकायेदारों पर क्या कार्रवाई हो सकती है, इसके बारे में विचार हो रहा है। जिससे निजी संस्थानों से पैसे वसूले जा सके।
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प्रमुख बकायेदार
बिजली निगम सिंघाना रोड 1852499 रुपये
डीडीपीओ आफिस पंचायत भवन 5768168 रुपये
डीसी कार्यालय नारनौल 5681848 रुपये
डीआरडी कार्यालय 4464824 रुपये
पुलिस लाइन 3567560 रुपये
टीवी टावर 607672 रुपये
सीएल स्कूल हुडा 6360954 रुपये
अपार होटल रेवाड़ी रोड 531768 रुपये
एसडी एजुकेशन पुल बाजार 690479 रुपये
भारती स्कूल 2252000 रुपये
सिटी मैरिज प्लेस 8641184 रुपये
शहर में प्रॉपर्टीज
व्यावसायिक - 08 हजार
आवासीय - 23 हजार
खाली प्लॉट - 07 हजार
कुल- 38 हजार प्रॉपर्टी
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