नगर परिषद की टीम पांच दुकानों को तोड़कर अपनी जमीन पर शनिवार को कब्जा कर लिया। इस दौरान कुछ लोगों ने नप की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन भारी पुलिस बल के कारण नप ने दुकानों को जेसीबी से तोड़वा दिया।
जानकारी के अनुसार नप कार्यालय से पास पांच दुकानें करीब 40- 50 साल से बनी हुई थी। नप का कहना था कि उसकी जमीन पर ये दुकानें बनी हुई हैं। इसके बाद यह मामला जिला कोर्ट में चला गया था। जहां पर कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई करनेे के बाद पिछले साल 30 अगस्त को नप के पक्ष में फैसला दे दिया था। इसके बाद से नप इस जमीन को कब्जा लेने की तैयारी कर रहा था। इसे लेकर 28 अक्तूबर को नप ने दुकानदारों को नोटिस दिया था। इस पर दुकानदारों ने तीन व चार नवंबर को नप को जवाब दिया। लेकिन, दुकानदार जवाब में कोई ठोस कागजात नहीं दे पाए। इसके बाद चार नवंबर को ही नप ने उन्हें दुकानों से सामान निकालने और छह कार्रवाई करने का नोटिस जारी कर दिया। इसे लेकर नप ने सभी तैयारियां पूरी कर ली थी, लेकिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं उपलब्ध होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। शनिवार की सुबह दस बजे से नप कार्यालय पर दुकानदारों और उनके परिजनों की भीड़ लग गई।
लोगों ने नप अधिकारियों को तर्क दिया कि इसके मामला कोर्ट में चल रहा है। इस पर लोगों ने हाईकोर्ट की एक कापी बीडीपीओ को दिखाया। लेकिन, इसमें स्टे जैसा कोई आदेश नहीं था। इसके बाद शनिवार दोपहर करीब एक बजे ड्यूटी मजिस्ट्रेट बीडीपीओ प्रमोद कुमार के साथ नप के ईओ केके यादव, सचिव अनिल कुमार, एमई सोहन सिंह, भवन निरीक्षक विकास शर्मा, पटवारी दर्शन सिंह के साथ भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इससे पहले दुकानदारों से दुकान से सामान नहीं हटाया था। जब दुकान के सामने दो जेसीबी लेकर अधिकारी पहुंचे तो दुकानदारों ने तत्काल जरूरी सामान हटाया। दो जेसीबी की मदद से करीब दोपहर तीन बजे तक पांचों दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान कुछ लोगों ने नप की कार्रवाई का विरोध करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस के आगे उनकी एक भी नहीं चली। दुकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान आसपास के लोग काफी संख्या में एकत्र हो गए। दुकानदार प्रेम भगत ने बताया कि 1989 किराए पर लिया था। दुकान की रजिस्ट्री 2003 में कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नप की ओर से नोटिस तक भी नहीं मिला। उनकी खाद की दुकान थी। प्रेम ने बताया कि काफी सामान नुकसान हो गया। इसके अलावा मोबाइल और मीट की दुकानें थी।
323.29 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा किया हुआ था
सचिव अनिल कुमार ने बताया कि मोहिनी गली के आगे नप की जमीन पर कुछ लोगों ने दुकानें बना ली थी। खसरा नंबर 5441 पर करीब 323.29 वर्ग मीटर जमीन लोगों ने कब्जा किया हुआ था। इसे लेकर शीला देवी बनाम नप और संजय बनाम नप का केस कोर्ट में चल रहा था। जिला कोर्ट से पिछले साल नप के पक्ष में फैसला आया था। अब दया पत्नी संजय ने कोर्ट में अपील की हुई है। इस पर नौ नवंबर को सुनवाई होनी है। लेकिन, कोर्ट ने इस पर स्टे नहीं दिया है। इसी प्रकार नप करीब 20 दिन पहले भी कार्रवाई थी। काठ मंडी में अवैध कब्जों को हटाया था।