डीआरडीए कार्यालय में सीइओ व जिला प्रमुख राजेश देवी के बीच पत्र पर हस्ताक्षर को लेकर तनातनी होती ह
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डीआरडीए कार्यालय में स्टाफ की कमी को लेकर जिला प्रमुख के लिखे पत्र पर सीईओ ने हस्ताक्षर नहीं किए तो जिला प्रमुख राजेश देवी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मीनारायण के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई। इसके अलावा जिला प्रमुख की गाड़ी को चुनाव समाप्त होने के बावजूद वापस नहीं देने को लेकर भी बहस हो गई। मामले को लेकर जिला प्रमुख ने एसपी को लिखित शिकायत दी है। फिलहाल जिला प्रमुख के लगाए आरोपों को सीईओ ने गलत बताया है।
जिला प्रमुख राजेश देवी ने सीईओ पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए बताया कि जिला परिषद कार्यालय में स्टाफ की कमी बनी हुई है। कच्चे कर्मचारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है, जबकि नियमित कर्मचारी आशुलिपिक रणदीप सिंह डीसी कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब स्टाफ की कमी को दूर करने के उद्देश्य से एक पत्र लिखकर आशुलिपिक रणदीप सिंह को वापस जिला परिषद में तैनात करने बाबत लिखा गया तो सीईओ ने उस पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। इसके अलावा राजेश देवी ने बताया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के चलते उनकी सरकारी गाड़ी को निर्वाचन कार्यालय ने ले लिया था। मगर चुनाव समाप्त होने एवं आचार संहिता हटने के बावजूद उन्हें उनकी सरकारी गाड़ी नहीं लौटाई जा रही। इसको लेकर अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें अब तक गाड़ी वापस नहीं दी। जिला प्रमुख ने आरोप लगाया कि सीईओ ने उनके साथ-साथ उनके पति से भी दुर्व्यवहार किया और पुलिस से गिरफ्तार कराने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि सीईओ का कहना है कि जिला प्रमुख को हस्ताक्षर कराने हो तो वह स्वयं उनके कार्यालय में आए। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब जनता के चुने हुए नुमाइंदों का ही काम नहीं होगा तो आम आदमी का अधिकारी क्या हाल करते होंगे।
दूसरी ओर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मीनारायण का कहना है कि मुझ पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने बताया कि पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार नहीं किया है। उनका कहना था कि अगर सरकारी कार्य में कोई बाधा पहुंचाता है व झगड़ा करता है तो उस पर मुकदमा बनवाया जा सकता है। यह बात उन्होंने महज हंसी- मजाक में कही थी। उनका यह भी कहना था कि जिला प्रमुख के पति संजीव यादव ने उन पर दबाव बनाने के लिए बेवजह हंगामा किया और ऑफिस को ताला लगाने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि जिला प्रमुख की गाड़ी को जिला निर्वाचन अधिकारी ने लिया था। अब इन्होंने गाड़ी वापस मांगी है। उनके मुताबिक यह गाड़ी एक्सपेंडीचर ऑब्जर्वर को दी गई थी और उनका कुछ काम बकाया है। वह दो दिन में पुन: आएंगे। इसके बाद उन्हें गाड़ी लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि स्टाफ के डीसी कार्यालय में लगे होने की उन्हें जानकारी ही नहीं थी। कार्यालय का काम सुचारु रूप से चल रहा है और जरूरत होगी तो स्टाफ वापस बुला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पत्र पर हस्ताक्षर करने का बेवजह हंगामा किया गया है।
बता दें कि सीईओ ने हंगामा होने उपरांत जिला प्रमुख द्वारा लिखे गए स्टाफ एवं गाड़ी संबंधित दोनों पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए। इस दौरान जिला पार्षद प्रदीप मालड़ा, जिला पार्षद इंद्रपाल यादव व जिला परिषद का स्टाफ भी मौजूद था।