महेंद्रगढ़। नगरपालिका ने शहर की 15 से अधिक खंडहर हवेलियों पर नोटिस लगाए हैं। घनी आबादी के बीच 30 से अधिक पुराने भवन जर्जर अवस्था में हैं। नगरपालिका की ओर से दो वर्ष पहले इन्हें खंडहर घोषित कर तोड़ने के लिए नोटिस लगाए थे। अधिकारियों व आमजन ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। शहर के बीचों बीच करीब 200 से 300 वर्ष पूर्व बने मकान हैं। यह मकान भी शहर की घनी आबादी के बीच हैं। ऐसे में हादसों का अंदेशा बना रहता है।
इन भवनों की दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी है कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। ऐसे में अगर इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो इनसे जनहानि भी हो सकती है। 30 से अधिक भवन ऐसे हैं जो कभी भी गिर सकते हैं। वहीं, नगरपालिका भी दो वर्ष पूर्व नोटिस चस्पा कर इनकी सुध लेना ही भूल गई। ऐसा नहीं है कि प्रशासन का ध्यान इस पर नहीं है। समय-समय पर प्रदेश सरकार नगरपालिका, नगर परिषद एवं नगर निगमों को खंडहर पड़े भवनों का सर्वे करने और ज्यादा ही जर्जर हो चुकी कुछ इमारतों पर कार्रवाई करने के आदेश भी जारी करती है।
शहर के 15 वार्डों में लगभग 30 से अधिक जर्जर भवन व पुरानी हवेलियां हैं। शहर के प्रत्येक वार्ड में तीन से चार जर्जर भवन हैं। मोहल्ला जवाहरनगर, करेलिया बाजार, मोहल्ला नीमड़ी नीचे, मोहल्ला बिढ़ाट, जेपी स्कूल के पास, परशुराम चौक, पुराना बीईओ कार्यालय, पुराना एक्सईएन कार्यालय, तहसीलदार आवास, दर्जियान गली सहित अन्य मोहल्लों में जर्जर भवन है। शहर में बहुत सुंदर-सुंदर हवेलियां है जो बंद पड़ी हैं। सही रखरखाव कर इन प्राचीन भवनों का सदुपयोग किया जा सकता है। खंडर हवेलियों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। ये खंडहर हवेलियां कभी भी गिर सकती है।
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पुरानी खंडहर हवेलियाें पर नो इंट्री का नोटिस लगाया दिया गया है। पुरानी खंडहर हवेलियां जर्जर हो चुकी हैं। लोगों से अपील है कि जहां भी नाटिस चस्पा किए गए हैं, उन पुराने भवनों के अंदर न जाएं।
-रमेश सैनी, नगरपालिका प्रधान, महेंद्रगढ़।