जिस धरती को मां का दर्जा प्राप्त है और जिसकी कोख से न जाने कितने चीजें पैदा होती है उसी का सीना बेदर्दी से छलनी किया जा रहा है। यही वजह है कि जिले में अवैध खनन से 200 से 500 फुट गहरी खानें बन गईं हैं। इतना ही नहीं लोगों का ध्यान खींचने वाले पहाड़ों की सूरत भी अब बदल चुकी है।
बता दें कि जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे लोगों द्वारा पृथ्वी द्वारा प्रदान की जा रही वस्तुओं का भी अंधाधुंध प्रयोग करना शुरू कर दिया। महेंद्रगढ़ में खनन कार्य से पृथ्वी खोखली होती जा रही है। यहां पर भारी मात्रा में बजरी, मिट्टी व पत्थरों का खनन हो रहा है। जिसके कारण हमारी पृथ्वी अंदर से खोखली होती जा रही है। नांगल चौधरी के दौंखेरा में तो हालात ऐसे बन गए हैं कि खनन करने वालों ने पृथ्वी के अंदर कई सौ फिट तक पत्थरों का खनन कर अंदर से पृथ्वी को खोखला कर दिया है। ऐसे ही हालात नांगल चौधरी क्षेत्र के धौलेड़ा, बायल, पांचनौता, मूसनौता, गोलवा व बखरीजा आदि क्षेत्र में अनेक खान हैं, जो पृथ्वी के अंदर तक बनी हुई हैं। यहां मैदान भी खान बन गए हैं।
महेंद्रगढ़ की पृथ्वी खनन से छलनी होती जा रही है। जिले में काफी मात्रा में खनन होता है। यहां के पहाड़ों से जहां पत्थर आदि का खनन हो रहा है। वहीं पहाड़ों के बाद खनन करने वालों ने पृथ्वी के अंदर तक खनन कर लिया। पहाड़ों पर पत्थरों के अलावा जिला में मिट्टी व बजरी का भी काफी मात्रा में खनन किया जाता है। यहां से खनन की हुई बजरी दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, रेवाड़ी के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों व यूपी के नोएड़ा, गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद तक जाती है। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले पत्थर व रोड़ी भी दूर-दूर शहरों में जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार यहां से प्रतिदिन करीब 1000 ट्रक रोड़ी, बजरी व मिट्टी के खनन होकर जाते हैं।
जिले में पांच जगह हो रहा खनन, सरकार ने दे रखी इजाजत
वैसे तो अरावली की पहाड़ी क्षेत्र में कोर्ट ने खनन पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद जिला में प्रशासन की इजाजत से पांच जगह खनन का कार्य हो रहा है। इनमें से रोज सैकड़ों ट्रक पत्थरों व बजरी के सुबह से शाम तक निकाले जाते हैं। हालात यह हैं कि नारनौल के पास स्थित एनएनएल वन माइन से रोज हजारों टन पत्थर निकल रहे हैं। जिसके कारण यहां का पहाड़ अपने आकार से बहुत ही छोटा हो गया है।
दौंखेरा में पृथ्वी के अंदर तक होने लगा खनन
जिला प्रशासन ने दौंखेरा में जो खनन के लिए माइन छोड़ी गई है, वह अब पूरे पहाड़ को चट कर गई है। अब वहां पर पहाड़ के नीचे यानी पृथ्वी के अंदर तक खनन होने लगा है। खनन का ठेका लेने वाले ठेकेदार ने वहां पृथ्वी का सीना चीरना शुरू कर दिया है।
नांगल चौधरी के गांवों में बुरा हाल
नांगल चौधरी के गांव मूसनौता, पांचनौता, दौंखेरा, बायल आदि में खनन का इतना बुरा हाल है कि यहां पृथ्वी के अंदर 200 से 300 फुट नीचे तक खानें बन गई हैं। इन खानों में से कई खानों में तो बरसात के मौसम में पानी जमा हो जाता है। जिससे ये झील जैसी दिखाई देती हैं तथा लोग इनमें नहाते हैं। यहां पर पृथ्वी को कई-कई फुट तक खोद दिया गया है।