नारनौल। पाश्चात्य एवं भारतीय संस्कृति स्त्रीनाम भूमिका विषय पर टॉक शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सिंघानिया विश्वविद्यालय और राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मुख्य अतिथि कैलाश चतुर्वेदी, पूर्व संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी, बीकानेर संभाग ने महाकवि माघ की जीवन-यात्रा को प्रेरणादायी बताया। वहीं संस्कृत भाषा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में पुरुष और स्त्री दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जब तक ये दोनों समानता और सहयोग के साथ कार्य नहीं करेंगे। तब तक समाज में संतुलन स्थापित नहीं हो सकता।
विशिष्ट वक्ता राजबाला, राजकीय विद्यालय, गोखरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति और सृजन के प्रतीक के रूप में देखा गया है। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपाध्यक्ष एवं कैंपस डायरेक्टर प्रोफेसर पीएस जस्सल, उपाध्यक्ष एवं मुख्य वित्त अधिकारी सुनील कुमार सोबती, रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान हाशमी, डिप्टी रजिस्ट्रार आरुषि सिंह, सांस्कृतिक संकाय के अधिष्ठाता डॉ. रामनिवास मानव व ज्योतिषाचार्य अभिमन्यु शर्मा के अतिरिक्त संस्थान के सभी विद्यार्थी व शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ भी उपस्थित रहे।