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महेंद्रगढ़ शिक्षा में अव्वल, खेलों में पिछड़ा : बबीता फौगाट

Sun, 21 May 2017 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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सरकार अपनी खेल नीति में बदलाव करें तथा खिलाड़ियों को दिए जाने वाला पैसा सीधे अधिकारियों के हाथों में देकर खिलाड़ियों को दे जिससे खिलाड़ियों को सीधा लाभ मिलेगा। आज ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं एवं लड़कियां घर की चारदीवारी को छोड़कर शिक्षा, खेल आदि क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रही हैं। यह बात हरियाणा की रेसलिंग स्टार बबीता फौगाट ने राव जयराम स्कूल में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में कही।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश मेें महेंद्रगढ़ क्षेत्र शिक्षा का हब बना हुआ है किंतु खेलों में यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। इसलिए यहां के युवाओं को पढ़ाई के साथ खेलों में भी भाग लेना चाहिए ताकि क्षेत्र खेलों में भी अव्वल बन सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन प्रतिभाओं को सही अवसर नहीं मिल पाते जिसके चलते प्रतिभाएं साधनों के अभाव में दम तोड़ देती है।  इस अवसर पर संस्था के प्रबंध निदेशक सुरेंद्र बेरी, सतीश खेड़ा, रामनिवास यादव, रामरख यादव, रामनिवास चौहान, डा. देवेंद्र यादव, औमप्रकाश यादव, बाबुलाल, अमर सिंह सोनी सहित स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।      
    
फौगाट परिवार देगा सप्त दिवसीय प्रशिक्षण
11 जून से 18 जून के बीच राव जयराम स्कूल महेंद्रगढ़ में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में फौगाट परिवार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेंगे। बबीता ने बताया कि शिविर के दौरान विद्यार्थियों पांच खेलों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो कि उनके पिता एवं गुरु द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता महावीर सिंह फौगाट द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें कुश्ती, कबड्डी, बॉस्केटबॉल, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स खेलों का प्रशिक्षण देंगे।
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देश में खोली जाएंगी 100 स्पोर्ट्स नर्सरी      
बबीता फौगाट ने बताया कि उनके पिता महाबीर सिंह फौगाट का सपना है कि 2024 और 2028 ओलंपिक खेलों में भारत पदक के मामले में चाइना तथा अमेरिका जैसे देशों की बराबरी करे। इसके लिए उनके पिता  में देश में अन्य संस्था के साथ मिलकर 100  स्पोर्ट्स नर्सरियां खोलेंगे और एक स्पोर्ट्स स्कूल भी खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि इन नर्सरियों सात वर्ष के बच्चों को ही खेलों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा  देश में स्पोर्ट्स जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है ताकि युवा स्पोर्ट्स के प्रति जागरूक हों। उन्होंने बताया इस शिविर का आयोजन उनके पिता महावीर फौगाट की प्रेरणा से ही आयोजन किया जा रहा है।   

ओलंपिक की कर रहीं तैयारी    
कुश्ती खिलाड़ी बबीता फौगाट ने बताया कि संसाधनों के अभाव में उन्हें कुश्ती का प्रशिक्षण लेना पड़ा लेकिन कभी जीतने का हौंसला नहीं छोड़ा और लक्ष्य को निर्धारित परिश्रम करती रही जिसके चलते उसे यह मुकाम हासिल हुआ। वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई तो हो चुकी हैं किंतु अभी तक ओलंपिक में मेडल प्राप्त नहीं किया है। आने वाले ओलंपिक खेलों के लिए वह जमकर तैयारी कर रही हैं। इस बार वो निश्चित रूप से देश के लिए मेडल लेकर आएंगी। 
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