फोटो 21 शिविर के दौरान जल महल पर भ्रमण करने पहुंचे छात्र व शिक्षक। स्रोत: संस्था
- फोटो : दिल्ली में शादी के दौरान गौरव-अल्फ्रेडा ऐंजिया। स्रोत
नारनौल। नारनौल के सैनी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे भारतीय भाषा शिविर के दूसरे दिन का आयोजन ऐतिहासिक जानकारी और सांस्कृतिक जागरूकता से परिपूर्ण रहा। विद्यालय के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य हुकम चंद ने विद्यार्थियों को नारनौल शहर के ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया। करीब 900 वर्ष पूर्व यहां के घने जंगलों में शेर पाए जाते थे, जिससे इस स्थान का नाम नाहरनौल पड़ा, जो कालांतर में नारनौल बन गया।
उन्होंने बताया कि नारनौल में स्थित जल महल, अलीजान की बावड़ी, चोर गुंबद, बीरबल का छत्ता और इब्राहिम लोदी का मकबरा जैसे स्मारक आज न केवल देशवासियों बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।
नवाब मिर्जा अलीजान ने वर्ष 1556 में अलीजान की बावड़ी का निर्माण करवाया था। वहीं वर्ष 1591 में जल महल का निर्माण करवाया गया था। इसी प्रकार शाहजहां के शासनकाल में उनके दीवान छत्ता राय बाल मुकुंद दास द्वारा बनाए गए छत्ते को आज बीरबल का छत्ता कहा जाता है। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया।