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लेफ्टिनेंट बेटी का जोरदार स्वागत

Mon, 15 Sep 2014 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नारनौल
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गांव दूलोठ अहीर में जन्मी शशी यादव भारतीय सेना में लैफ्टिनेंट के पद की ट्रेनिंग पूरी करके चेन्नई से सोमवार को अपने गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने उसका जोरदार स्वागत किया। शशी यादव इस गांव की पहली लड़की है जो लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुई है। इसने न केवल गांव का है बल्कि पूरे महेंद्रगढ़ जिले का नाम रोशन किया है। ग्रामीणों ने उसे हार्दिक बधाई दी।
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शशी के दादा प्रताप सिंह ने बताया कि उसकी पोती शशी यादव ने अपनी परिवार की परंपरा को निभाया है। वह स्वयं आर्मी में सूबेदार के पद से रिटायर हुए हैं, शशी के पिता वीरेंद्र सिंह यादव भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और उसका भाई अनुपम यादव भी आर्मी में ही कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वह केवल उनकी बेटी ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र जिले और प्रदेश की बेटी जो भारतीय सेना में अपनी सेवा देगी।

शशी बचपन से ही बड़ी होशियार और चंचल थी। वह अपने पिता के साथ ही रहने के कारण विभिन्न स्थानों से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। उसने सोफिया स्कूल, अजमेर से 10 वीं, मध्यप्रदेश राज्य के जबलपुर जिले में काइस चर्च स्कूल से 12  वीं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम  कॉलेज से फिलोस्पी ऑनर्स तक की पढ़ाई की है। सोमवार को कुल देवता बाबा फतेहराम आश्रम में जाकर बाबा अमीलाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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लेफ्टिनेंट शशी यादव से सीधी बातचीत
प्र0    आपने आर्मी में ही जाना क्यों पसंद किया?
उ0  इस क्षेत्र में जाने के लिए मेेरे दादा, पापा और भाई प्रेरणा स्रोत बने। क्योंकि परिवार के सभी सदस्य आर्मी में रहकर देश सेवा कर रहेें तो मैं भी परिवार की ही परंपरा को निभाया है। अब मैं भी देश सेवा बखूबी करूंगी।
प्र0    आपकी अपनी सफलता का श्रेय किसे देंगी?
उ0     मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने पापा वीरेंद्र सिंह और मम्मी को दूंगी। उन्होंने मेरे इस लक्ष्य का प्राप्त करने में भरपूर सहयोग किया है। उन्होंने एक अच्छे मां-बाप का फर्ज भी अदा किया है।
प्र0    आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उ0    देश की हर लड़की का इस प्रकार के सपने पालने चाहिए और उनको पूरा करने के लिए आत्मविश्वास के साथ मेहनत करनी चाहिए। देश और प्रदेश की प्रत्येक लड़की राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
प्र0    आपने कितने महीने की ट्रेनिंग की?
उ0     मैं जब दिल्ली विश्वविद्यालय में फिलोस्पी आनर्स कर रही थी तभी मैंने कंबाइन डिफेंस सर्विस की परीक्षा दी थी और उसमे मेरा चयन हो गया उसके बाद 11 महीने की ट्रेंनिग चेन्नई में हुई जो कि 13 सितंबर को समाप्त हुई है।
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