नारनौल। नारनौल नई मंडी स्थित अग्रवाल सभा भवन में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सर्वप्रथम आचार्य मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान से सभी देवताओं का पूजन करवाया।
आचार्य बजरंग शास्त्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन को उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया। इंद्र ने बृज में आकर भगवान से क्षमा मांगी। कृष्ण ने कहा कि इंद्र जो मेरा अपमान करता है उसे मैं सहन कर लू, लेकिन जो मेरे भक्तो, संतों को कष्ट देता है उसे मैं कभी सहन नही करता हूं। क्योंकि भगवान कृष्ण कहते हैं कि मेरा अवतार संतों भक्तो की रक्षा और दुष्टों राक्षसों के संहार के लिए ही होता है।
आचार्य ने बताया कि गोपियां कोई साधारण स्त्रियां नही है। आचार्य ने बताया कि जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया और हर बार पराजित होना पड़ा। 18वीं बार जरासंध ने 11000 ब्राह्मणों को पाठ पर बैठाया और अपने सेनापति से कहा कि यदि इस बार मेरी हार हो जाए तो इन ब्राह्मणों को मौत के घाट उतार देना तो भगवान अपने भक्तो की रक्षा के लिए युद्ध बीच में छोड़कर चले गए।
कथा के अंत में भगवान श्री कृष्ण और विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि के विवाह का सुंदर वर्णन किया। इस अवसर मुख्य रूप से हनुमान प्रसाद अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, विकास अग्रवाल, महावीर प्रसाद अग्रवाल, मोहन अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, राजेश चौधरी, रजत चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, लोकेश चौधरी, विकास गोयल, जीतेंद्र अग्रवाल, अनिल गोयल संजय अग्रवाल, स्वीटी अग्रवाल, ऋतु गोयल, प्रीति अग्रवाल, रेखा संघी ,काजल मेहता एवं समस्त मंगल परिवार माैजूद रहे।