फोटो नंबर- 11बिजली आपूर्ति बंद रहने के कारण नगर परिषद में कार्य प्रभावित रहा और अंधेरे में
नारनौल। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने पूरे जनजीवन की रफ्तार थाम दी। बुधवार रात 10 बजे से बिजली संकट शुरू हो गया था। वीरवार सुबह 10 बजे तक करीब 350 गांवों और शहर की 31 कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। इससे लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसते रहे, मोबाइल डिस्चार्ज होने लगे और रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हुए। घरों से लेकर सरकारी दफ्तरों, मंडियों और उद्योगों तक लोग परेशान रहे।
बिजली बंद होने से लोग सुबह से नलों में पानी का इंतजार करते रहे। हड़ताल की आशंका में जो टंकियां भरी थीं, वे भी दोपहर तक खाली हो गईं। मोबाइल की बैटरी डाउन होने लगी तो लोगों ने बैटरी सेवर चालू कर लिया। ई-रिक्शा सहित इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों से गायब रहे।
किराणा और सब्जी की दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटे बंद रहे। तीन दिन की हड़ताल के डर से रात के अंधेरे की चिंता बढ़ी और दीवाली से पहले मोमबत्ती की बिक्री सबसे ज्यादा रही।
इस कारण सीएससी केंद्र दोपहर 1 से 2 बजे तक इनवर्टर से चले, फिर बैटरी खत्म होने पर काम बंद करना पड़ा। लघु सचिवालय के सरल केंद्र में भी केवल कुछ जरूरी काउंटर चालू रहे और लोग परेशान होते रहे।
मंडी में खरीद रुकी, किसान परेशान
दोपहर बाद मंडी में गेटपास जारी होना लगभग बंद हो गया। नेट सेवा प्रभावित रहने से व्यापारी जे-फार्म के तहत खरीद नहीं कर पाए। कांटे और सिलाई मशीनें बंद रहने से तुलाई और सिलाई का काम ठप रहा।
जनरेटर हुए महंगे, उद्योग बंद
छोटे जनरेटर की मांग बढ़ गई और किराया 500 रुपये से बढ़कर करीब 1 हजार रुपये हो गया, ढुलाई का खर्च अलग। इंडस्ट्रीयल एरिया लघु उद्योग के सदस्य दौलतराम गर्ग के अनुसार क्षेत्र के करीब 15 से 20 लघु उद्योगों में उत्पादन बंद रहा। महावीर चौक की ट्रैफिक लाइट बंद रही, इसलिए बस स्टैंड और होंडा चौक सहित कई जगह अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए।