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मैं और मेरा छोड़ने से मिलता है आत्मिक सुख : मुनि विभोर

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नारनौल। धर्मनगरी नारनौल के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महामंडल विधान के तहत धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आचार्य आर्जव सागर के शिष्य मुनि महंत सागर, मुनि विभोर सागर और मुनि सानंद सागर ने उत्तम आकिंचन धर्म पर प्रवचन दिए। उन्होंने परिग्रह यानी वस्तुओं के संग्रह और मोह को छोड़ने को आकिंचन धर्म बताया।
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मुनि विभोर सागर ने कहा कि चीजों को जमा करने और उनसे मोह रखने की आदत आत्मा के दुखों का बड़ा कारण है। उन्होंने श्रद्धालुओं को ‘मैं और मेरा’ के भाव से दूर रहने की प्रेरणा दी। मुनि महंत सागर ने कहा कि मोक्ष के लिए मोह और विकल्पों से मुक्त होना जरूरी है। त्याग करने के अहंकार को भी छोड़ना चाहिए। मुनि सानंद सागर ने कहा कि गृहस्थ भी अपनी इच्छाओं को सीमित कर आकिंचन धर्म अपना सकते हैं।
प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि जैन समाज 10 दिन तक दसलक्षण पर्व मनाएगा। इस दौरान उत्तम क्षमा सहित दस धर्मों का पालन किया जाएगा। विशाल शोभायात्रा भी निकाली गई।
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नलापुर स्थित जैन अतिशय क्षेत्र में भजन संध्या और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। बरखा जैन, टीना जैन और रेखा जैन समेत कई श्रद्धालुओं ने कठिन उपवास रखे। धर्म सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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