नगर परिषद में हर जगह गड़बड़झाला है। परिषद द्वारा किए गए कार्यों पर भी रोजाना अंगुली उठती रहती है। भ्रष्टाचार के मामले में भी परिषद का नाम शहर में सबसे ज्यादा लिया जाता है। जमीन की एनओसी हो या भवन बनाने का नक्शा, हर काम बिना दाम के नहीं चलता। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो नगर परिषद को ही चूना लगा रहे हैं। हालांकि इन लोगों के साथ परिषद कर्मियों की मिलीभगत अवश्य हो सकती है। मगर इन शातिर दिमाग लोगों ने नप द्वारा तहबाजारी के तहत अलाट किए गए खोखो को पक्का दुकानों में तब्दील कर दिया है। जिससे ये परिषद को नाममात्र से भी कम किराया देकर लाखों रुपए प्रतिमाह कमा रहे हैं। ऐसे दुकानदारों के कारण परिषद को भी हर माह लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर परिषद ने मुख्य बाजारों व मार्गों पर अपनी जमीन पर खोखो व दुकान बनाकर उनको किराये पर दिया हुआ है। इन खोखो व दुकानों का किराया नाममात्र का है। हालांकि 2010 के बाद अलाट हुई दुकानों का किराया बेशक 4 से पांच हजार रुपए महीना हो गया है लेकिन इससे पहले बने खोखो व दुकानों का किराया महज 100 रुपए मासिक से भी कम है। वहीं तहबाजारी के तहत अलाट किए गए खोखो के स्थान पर अब किरायेदारों ने वहां पर पक्की दुकानों का निर्माण कर लिया है। खोखो से पक्की दुकानों में तब्दील हुए किसी को चार साल तो किसी को पांच साल भी हो गए हैं लेकिन अभी भी रिकार्ड में ये दुकानें खोखे ही हैं तथा इनका किराया भी खोखो जितना ही लिया जा रहा है। जिसके कारण नप को हर माह लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
यहां हैं नप के खोखे व दुकानें
नप के खोखे व दुकानें शहर के मुख्य बाजारों में हैं। नप द्वारा शहर के सबसे व्यस्ततम पुल बाजार पर 28 खोखे अलाट किए हुए हैं। वहीं नई मंडी में भी करीब 30 खोखे, सिंघाना रोड पर करीब 20 खोखे अलाट किए हुए हैं। इनमें सिंघाना रोड व मंडी में पांच से दस खोखों को छोड़ दें तो अन्य सभी खोखों की जगह अब वहां पक्की दुकानें किरायेदारों ने बिना इजाजत के बना ली हैं। यदि किसी ने इजाजत भी ली है तो अभी भी रिकार्ड में वे खोखे ही हैं। जिनका किराया नाममात्र से भी कम है। इसके अलावा परिषद द्वारा महाराजा चितवन वाटिका के पास भी दुकानें अलाट की हुई हैं।
आग लगी, बनी दुकानें
नई मंडी में कुछ खोखों से दुकानें तो आगजनी के बाद बनी हैं। मंडी में खोखों में आगजनी की दो से तीन घटनाएं हुई। बाद में शातिर दुकानदारों ने उनको रिवोनशन के नाम पर खोखों से दुकानों में तब्दील कर दिया।
पुल पर बन गई सब दुकानें
करीब एक दशक पूर्व शहर के व्यस्ततम पुल बाजार पर खोखे होते थे। धीरे-धीरे किरायेदारों ने इनको दुकानों में तब्दील कर दिया। यहां 28 खोखे अब पक्की दुकान में तबदील हो गए।
किरायेदारों ने चढ़ाई दुकानें किराये पर
यहां तहबाजारी के तहत किरायेदारों ने दुकानों को किराये पर चढ़ा दिया है। अब इनमें से कई दुकानों पर वे किरायेदार नहीं हैं, जो नप के रिकार्ड में हैं। ऐसे किरायेदार नप को तो 100 रुपए प्रतिमास किराया देते हैं, जबकि खुद के द्वारा दिए गए किरायेदार से आठ से दस हजार रुपए प्रतिमाह किराया ले रहे हैं। वहीं यहां पर एक किरायेदार ने तो एक बैंक को एटीएम लगाने के लिए भी जगह दे दी है।
दुकान बनाते समय बढ़ाई लंबाई
यहां दुकानदारों ने दुकान बढ़ाते समय दुकान की लंबाई नाले पर बीम व पोल खड़े कर बढ़ा दी है। ऐसे दुकानदारों ने आठ फुट लंबे खोखे को 16 फुट तक लंबी दुकान में तब्दील कर दिया।
पुल बाजार से प्रति माह तीन लाख का नुकसान
पुल बाजार में करीब तीन लाख रुपए किराया दस हजार रुपए प्रति दुकान से कम से कम आना चाहिए, जबकि यहां सबसे कम किराया 72 रुपए तथा सबसे अधिक किराया 338 रुपए प्रति माह है। ऐसे में इतना ही नई मंडी व इससे दुगना सिंघाना रोड पर किराया आना चाहिए। ऐसे में नप को हर माह तहबाजारी से कम से कम दस से 15 लाख रुपए का नुकसान होना चाहिए।
तहबाजारी के तहत अलाट किए गए खोखों पर दुकान नहीं बनाई जा सकती। अगर किसी ने वहां दुकान बना ली है तो वह गलत है, उसके खिलाफ नप कार्रवाई कर सकती है। इस बारे में अधिकारियों से बात हो चुकी है। जल्द ही इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।-भारती सैनी, चेयरमैन, नगर
जिन लोगों ने खोखों से पक्की दुकानें ली, उनको नोटिस दिया जाएगा। जल्द ही ऐसे किरायेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी नियमों से हटकर काम नहीं कर सकता।-अंकित वशिष्ठ, एमई, नगर परिषद, नारनौल