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Mahendragarh-Narnaul News: करवा चौथ पर्व आज... चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी सुहागिनें

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महेंद्रगढ़। रविवार को धूमधाम से महिलाओं की ओर से करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। शनिवार को शहर के बाजारों में महिलाओं की खासी भीड़ उमड़ी। चूड़ियां, कपड़े, शृंगार और पूजा के सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। ज्वेलरी, चूड़ी और कपड़ों की दुकानों और ब्यूटी पार्लर पर महिलाओं की भीड़ रही। शहर के शॉपिंग कॉम्लेक्स, सब्जी मंडी रोड, मसानी चौक, 11 हट्टा बाजार, परशुराम चौक सहित शहर के मुख्य बाजारों में महिलाओं की खासी भीड़ रही। वहीं, त्योहारी सीजन को लेकर बाजारों में कपड़े, आभूषण, पर्व से जुड़े सामान की दुकानें सज गई हैं। सुबह से शाम तक बाजारों में करवाचौथ के सामान की खरीदारी को लेकर काफी भीड़ है। ब्यूटी पार्लर में रविवार को करवा चौथ को लेकर एडवांस बुकिंग शुरू हो गई।
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- अखंड सुहाग की कामना के लिए सुहागिन करेगी करवा चौथ का व्रत : भारद्वाज
अखंड सुहाग की कामना के लिए महिलाएं कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत करती हैं। ये व्रत सुहागिनों द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुखद गृहस्थ जीवन के लिए किया जाता है। क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि रविवार को करवा चौथ का व्रत है। यह व्रत सूर्योदय से पहले रखा जाता है और रात को चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
इस बार करवा चौथ पर कृतिका और रोहिणी नक्षत्र का युग्म संयोग बन रहा है। ये दोनों ही नक्षत्र शुभता के प्रतीक माने गए हैं। इस शुभकारी योग में पूजा और व्रत करने से अनंत गुणा फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर हो जाते है इसलिए इस चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।
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- करवा चौथ पर चांद की क्यों होती है पूजा:

चंद्रमा औषधियों का स्वामी है। चांद की रोशनी से अमृत मिलता है। इसका असर संवेदनाओं और भावनाओं पर पड़ता है। पुराणों के मुताबिक चंद्रमा प्रेम और पति धर्म का भी प्रतीक है। इसलिए, सुहागिनें पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में प्रेम की कामना से चंद्रमा की पूजा करती हैं। चांद उगने के बाद अर्घ्य देती है। अपने पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। महेंद्रगढ़ में पूरे जिलेभर में चांद शाम 7:59 बजे उदय होगा। शाम 5:16 बजे से 7:56 बजे के प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं, भविष्य पुराण की कथा के मुताबिक चंद्रमा को गणेश ने श्राप दिया था। इस कारण चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने से दोष लगता है। इससे बचने के लिए चांद को सीधे नहीं देखते और छलनी का इस्तेमाल किया जाता है।
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