गांव करीरा में बाजरा मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने में जिले में पहला स्थान बन गया है। किसान महावीर सिंह तथा उनके परिवार ने मिलकर बिस्कुट केक तथा अन्य पदार्थ बाजरे तैयार करने शुरू कर दिये है। ये विचार डॉ. रमेश समन्वयक कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ ने बाजरे से निर्मित किये जाने वाले लघु उद्योग का उद्घाटन रविवार को करने के बाद उपरांत व्यक्त किये। इस मौके पर डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि बाजरा कम पानी से पकने वाला पौष्टिक तत्वों से भरपूर अन्न होता है। इस फसल से पशुओं को चारा भी मिलता है लेकिन बाजरे के ज्यादा स्वादिष्ट में होने के चलते नई पीढ़ी से दूर भागती है। परंतु इस प्रसंस्करण इकाई से बाजरे से बिस्कुट, केक और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के खुलने से खाने वालों के स्वास्थ्य लाभ तो मिलेगा ही वहीं बाजार में मांग बढ़ने का लाभ किसानों को भी होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बाजार में गेहूं, मैदा, कोर्न के केक, कुकीज ही मिलते हैं। परंतु ज्यादा पौष्टिक और मधुमेह सहित कई रोगों में लाभकारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला बाजरा होता है और बाजरे से अब अनेकों पदार्थ तैयार होकर बाजार में उपलब्ध हो जाएंगे। इस प्रकार जहां कृषि विश्वविद्यालय हिसार में यह बिस्कुट बनते थे किंतु अब करीरा में भी बनने लग गए हैं। इस मौके पर डॉ. पूनम यादव जिला विस्तार विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव, डीएचओ मनदीप सिंह बागवानी विभाग नारनौल ने भी अपने- अपने विचार रखे और कहा कि इस प्रसंस्करण केंद्र से अब उन लोगों को लाभ मिलेगा जो गेहूं के खाने से एलर्जी का शिकार हो जाते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रगतिशील किसान महाबीर सिंह करीरा बेर, अचार, कैंडी आदि अपने खेत के उत्पादों से बनाने के लिए मशहूर हैं जिन्हें आंवला के लड्डू पर पुरस्कार मिल चुके हैं। उसी परिवार में ज्योति महिला के नाम पर यह प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया है।