महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ में पिछले 42 सालों से दो नेता ही राज करते आ रहे थे। इसके कारण लोग भी इस चुनाव में बदलाव का मन बना चुके थे। हालांकि भाजपा की ओर से पांच बार कमल खिलाने वाले प्रो. रामबिलास शर्मा का पत्ता काटकर पहले ही बदलाव के संकेत दे दिए थे।
दूसरी ओर पिछले 9 बार हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से राव दान सिंह व भाजपा की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा के बीच सीधी टक्कर रही थी। लोगों के इस बदलाव की राह भाजपा ने रामबिलास शर्मा का पत्ता काटकर आसान कर दी थी। वहीं दूसरे धुरंधर को हराकर लंबे समय से दोनों के चले आ रहे तिलिस्म को भी समाप्त कर दिया।
क्या रहे भाजपा की जीत के कारण
भाजपा के कद्दावर कहे जाने वाले प्रो. रामबिलास शर्मा व कंवर सिंह यादव लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद नायब सैनी भी पांच बार महेंद्रगढ़ विधान सभा पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद करते रहे। साथ ही भाजपा की बिना पर्ची-बिना खर्ची का जादू भी क्षेत्र के लोगों में खूब चला। साथ ही भाजपा के प्रो. रामबिलास शर्मा के विकल्प के रूप में कंवर सिंह यादव ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। आमजन के बीच पहुंचना व साधारण छवि ने कंवर सिंह की ताकत को और अधिक बढ़ा दिया। प्रो. रामबिलास शर्मा ने टिकट कटने के बाद स्पष्ट कर दिया था कि वह पार्टी का डंडा एवं झंडा नहीं छोड़ेंगे। चुनावी जनसभाओं में सीधे तौर पर कंवर सिंह के साथ मैदान में नहीं उतरे, जिसके कारण लोग भी लगातार कंवर सिंह से जुड़ते गए।
शहर में ठप विकास व ईडी की कार्रवाई से गिरता गया कांग्रेस का ग्राफ
महेंद्रगढ़ विधान सभा सीट पर चार बार कांग्रेस को जीत दिलाने वाले राव दान सिंह ने 2019 में विधायक बनने गुरुग्राम में अधिक समय बिताया। कांग्रेस पार्टी से विधायक होते हुए भी शहर में पिछले पांच सालों के दौरान विकास कार्याें को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इसके कारण लगातार लोगों के बीच लोकप्रियता कम होती चली गई। इसके बाद गत लोक सभा चुनावों के बाद राव के ठिकानों पर ईडी की रैड व संपत्ति अटैच करना भी लोकप्रियता घटने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।