नारनौल। दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व रविवार को उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हुआ। बुधवार को चौथे दिन शौच धर्म रहा। सुबह से ही नारनौल के तीनों जैन मंदिरों में अभिषेक और दर्शन करने वालों की कतार लगी रही।
चौथे दिन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिरों में शांतिधारा करने का सौभाग्य सचिन जैन, नितिन जैन को प्राप्त हुआ। डाॅक्टर सुषमा के सानिध्य में शांतिधारा व मंगल आरती व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जैन समाज के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि काल से आत्मा सप्त धातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। आत्मा का स्वरूप ही शौच धर्म है। इसीलिए ज्ञानी महामुनि इसी का ध्यान करते हैं। अगर वे घृणा करेंगे तो शुद्धात्म पद की प्राप्ति उनके अत्यंत दूर है, ऐसा समझना चाहिए। इस अवसर पर अतुल जैन, अरुण जैन, दीपक जैन, महावीर जैन, अंकुर जैन, सुरेंद्र जैन, आशु, मोहित, ऋतु जैन, सरला जैन, कृष्ण, यश जैन, मितलेश जैन, रिंकू जैन, पारस जैन उपस्थित रहे।