फोटो नंबर-02बैठक में मौजूद विभिन्न संगठनों के लोग। स्रोत-स्वयं
नारनौल। अनुसूचित जाति(अजा)-अनुसूचित जनजाति (जजा) कोटे के पदों को बैकलॉग से भरने की बजाय सामान्य वर्ग से भरने के मामले में विभिन्न संगठनों की बैठक समिति कार्यालय में आयोजित की गई। अध्यक्षता सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चंदन सिंह जालवान ने की। विभिन्न संगठनों द्वारा सामूहिक हस्ताक्षर युक्त पत्र राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग व राजस्थान के मुख्यमंत्री को लिखकर अधिसूचना को जनहित में निरस्त करने की मांग की है।
संघर्ष समिति के महासचिव बिरदी चंद गोठवाल ने कहा कि राजस्थान में प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों की कमी नहीं है, लेकिन राजस्थान सरकार द्वारा सोची समझी चाल के तहत योग्य अभ्यर्थियों के ना मिलने का सहारा लेकर आरक्षित सीटों को सामान्य वर्ग से भरना गलत है।
गोठवाल ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा वीरवार को बड़ा फैसला लेकर विभिन्न विभागों में गत दो वर्षों से खाली पड़े अनुसूचित जाति, जनजाति कोटे के पदों को बैकलॉग से भरने की बजाय सामान्य वर्ग से भरने के निर्णय की अधिसूचना जारी की गई है। जो अनुसूचित जाति व जनजाति के हक अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान सरकार ने इसके लिए राजस्थान अधीनस्थ सेवा संशोधन प्रथम संशोधन नियम 2020 को स्वीकृति देकर प्रभावी किया है। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के अनेकों विभाग में रिक्त पड़े ऐसे पद जिन पर अनुसूचित जाति व जनजाति के योग्य अभ्यर्थी ना मिलने के कारण इन्हें बैकलॉग में रिक्त छोड़ दिया गया था। विभिन्न संगठनों ने इस जन विरोधी कार्यशैली की घोर निंदा करते हुए जनहित में उक्त अधिसूचना पर पुनर्विचार कर इसे निरस्त करने की मांग की है। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों के अनेक लोग उपस्थित रहे।