महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन डॉ. पवन शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के राजनीतिक पक्ष पर चर्चा की।
उन्होंने वेद, पुराण, श्रुति, और, स्मृतियों में भेद बताया व विस्तारपूर्वक वर्णन किया। डॉ. पवन शर्मा के अनुसार भारत अनंतकाल से ज्ञान का केंद्र रहा है। भारतीय चिंतन में कर्म व धर्म प्रधान है। उन्होंने कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत का उल्लेख करते हुए राजा के कर्तव्य और राज्य के अंगों के बारे में बताया। उन्होंने कौटिल्य के मंडल सिद्धांत के बारे में बताकर भारत के अंतरराष्ट्री संबंधों के बारे में भी जानकारी प्रदान की। इससे पूर्व में वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार मीणा ने मुख्य वक्ता डॉ. पवन शर्मा का अभिनंदन किया।