कनीना। गांव मुंडिया खेड़ा में उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने किसान मनीराम के खजूर के बाग का निरीक्षण कर किसानों को खजूर में कृत्रिम परागण की तकनीक की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि खजूर वर्गीय पौधों में नर व मादा फूल अलग-अलग पेड़ों पर लगते हैं। प्राकृतिक रूप से परागण में कम सफलता मिलती है। इनमें कृत्रिम परागण किया जाता है। खजूर की खेती एक समयबद्ध कार्य है तथा इसका विशेष महत्व है। शोध के अनुसार यह पाया गया है कि सुबह 8 से 12 बजे के बीच किए गए परागण से अच्छी सफलता मिलती है। यह प्रक्रिया मादा पुष्पगुच्छ के खुलने के 2-3 दिनों के भीतर करनी चाहिए अन्यथा परागण विफल हो जाता है। बागवानी विभाग की तरफ से खजूर की खेती पर 1 लाख 40 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है।