फोटो संख्या:56 बर्तन भंडार पर बर्तन बनाते हुए कुंभकार। संवाद
महेंद्रगढ़। शहर में सौ से अधिक परिवार मिट्टी के मटकों व कैंपरों के कारोबार से जुड़े हुए हैं। गर्मी के चलते बाजार में टोंटी लगे मटके एवं मिट्टी से बने कैंपरों की मांग तेजी से बढ़ी है। इस समय बाजार में साधारण मटके की कीमत 70 रुपये से 100 रुपये तक क्षमता के हिसाब बिक रहा है।
वहीं पांच लीटर के छोटे मटके 80 रुपये तक उपलब्ध हैं। बडी झाल 250 रुपये, मिट्टी के टोंटी लगे कैंपर 120 रुपये तक उपलब्ध हैं। पक्षियों के लिए पानी सकोरे 40 रुपये, चिकनी मिट्टी पानी की बोतल 150 रुपये व सुराही 150 रुपये के हिसाब से बिक रहे है।
कारीगर बलबीर प्रजापत ने बताया कि इस समय चिकनी मिट्टी नारनौल, कांटी खेड़ी, लहरोदा व खुडाना क्षेत्र से मंगवाई जा रही है। महेंद्रगढ़ क्षेत्र में सौ से अधिक परिवार मिट्टी के कारोबार से जुड़े हैं। गर्मी के मौसम में लोग मटके का पानी पीना पसंद करते है।
शहर व गांव के अनेक लोग पानी प्याऊ के लिए मटके ले जा रहे हैं। इसके साथ-साथ गर्मी होने के कारण पक्षियों के लिए सकोरे अधिक मांग हो रही है। मटके बनाने के लिए राजस्थान से चिकनी मिट्टी मंगवाई जा रही है। मांग के अनुसार मटके तैयार नहीं कर पा रहे है। गर्मी के इस सीजन में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद है।
सुरेश कुमार प्रजापत व कन्हैयालाल प्रजापत ने बताया कि मिट्टी के बर्तन में पानी रखने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है जबकि फ्रिज में पानी बिजली की मदद से ठंडा होता है। मिट्टी के बर्तन रखने से बिजली की बचत होती और मिट्टी के बर्तन बनाने वालों को फायदा होता है।
ग्रामीण क्षेत्र में जोहड़ों की छटाई के द्वारा निकलने वाली चिकनी मिट्टी लेकर आते है। एक ट्रैक्टर ट्राली पर तीन से चार हजार रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है लेकिन इस समय मटकों, सकोरों के साथ-साथ विशेषर मिट्टी से बने टोंटी लगे कैंपर की बड़ी मांग है। मांग के अनुसार मिट्टी के बर्तन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।