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नारनौल-महेंद्रगढ़ की धरती से कम हो रहा आयरन

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नारनौल। सावधान! यूरिया का जमीन में अत्यधिक प्रयोग अब हमारी रोटी को भी कमजोर बना रहा है। उसमें जो प्रोटीन होना चाहिए वह अब कम है। कम इसलिए क्योंकि जमीन में आयरन व जिंक की मात्रा लगातार कम हो रही है। यह बात हम नहीं कह रहे जिले में गांव- गांव जाकर मिट्टी पानी की जांच करने वाली मोबाइल वैन ने जो सैंपल एकत्रित करने के बाद उसके जो परिणाम सामने आ रहे हैं वह बहुत अच्छे नहीं हैं।
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मिशन के तहत अभी तक 49 गांवों के 49 सैंपल लिए गए हैं। किसी गांव में आयरन व जिंक की मात्रा सामान्य है तो किसी में बहुत कम। यह सब इसलिए है क्योंकि यूरिया के अधिक प्रयोग से मिट्टी की शक्ति कमजोर हो रही है। ऐसा होने से गेहूं व दूसरे अनाज की जिन प्रजातियों को बोया जाता है उसमें भी वो ताकत नहीं रहती जो होनी चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार जिंक व आयरन से अगर जमीन भरपूर होगी तो अनाज में भी ताकत रहेगी। डॉ. संगीता यादव की मानें तो हमारे भोजन में जिंक व आयरन जरूरी है। आयरन की कमी होने से एनीमिया की समस्या होती है, जिससे शरीर में थकावट आती है। चेहरे की रंगत फीकी पड़ने लगती है। वहीं जिंक की कमी होने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और जख्म होने पर जल्दी नहीं भरते हैं।
पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक
इसके अलावा पानी में फ्लोराइड की मात्रा भी अधिक मिल रही है। यह सामान्य से अधिक है। मिशन के तहत पानी के 9 तत्वों की केमिकल जांच की गई। जिसमें टीडीएस, टरबिडिटी, नाइट्रेट, सल्फेट का मान सामान्य से अधिक मिला है। साथ ही फ्लोराइड व हार्डनेस के मामले में सैंपल सामान्य से अधिक होने व उपयोग से अधिक पाया गया। फ्लोराइड जहां एक पीपीएम तक होना चाहिए लेकिन यहां 1.9 पीपीएम है। पानी में हार्डनेस की 628.6 मात्रा रही। जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर पानी में हार्डनेस की मात्रा 100 से कम है तो वह सोफ्ट जल है।
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फ्लोराइड से हड्डी रोग का खतरा, शरीर को नुकसान
अत्यधिक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से मानव शरीर में अस्थि (हड्डी) रोग उत्पन्न होती है। शुरूआती चरण में दांत पीले पड़ने लगते हैं।
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