नारनौल। साल 2025 में महिलाओं से जुड़े अलग अलग मामलों से संबंधित कुल 423 शिकायतें महिला थाने में दर्ज की गईं। इनमें से 135 मामले ऐसे भी रहे जिनमें नौबत घर टूटने तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में महिला थाना की एसएचओ ने अपनी सूझबूझ व तजुर्बे के बल पर दोनों पक्षों को समझाते हुए रजामंदी कराई। अब भी कई मामले ऐसे हैं जिनकी काउंसिलिंग की जा रही है।
जून में आए सबसे अधिक मामले
थाने से मिले रिकॉर्ड के अनुसार इस साल के जून में सबसे अधिक 49 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जुलाई में 43 और सबसे कम 18 मामले फरवरी में दर्ज किए गए थे। थाने में दर्ज हुए आधे से ज्यादा मामले सास बहू के झगड़े के शामिल हैं और इनमें खास बात ये रही कि इनमें से अधिकतर महिलाओं के पति शहर से बाहर या फौज में नौकरी करते हैं।
दोनों पक्षों की बातें एकांत में सुनी जाती हैं : एसएचओ
एसएचओ मंजूषा ने बताया कि इस साल में वह अभी तक 120 परिवारों को तो उजड़ने से बचा चुकी हैं। साथ 15 मामले ऐसे भी हैं जिनकी काउंसिलिंग की जा रही है। काउंसिलिंग के दौरान दोनों पक्षों की बातें एकांत में सुनी जाती हैं और वे सभी बातें एकदम गुप्त रखी जाती हैं। उनके अनुसार आमतौर पर 2 से 3 काउंसिलिंग में बात बन ही जाती है लेकिन इस साल दो मामले ऐसे रहे जिनमें 4 से भी अधिक काउंसिलिंग करनी पड़ी।
केस 1:
जिले की एक महिला ने शिकायत दी कि उसकी सास दहेज को लेकर, खाना पकाने व कपड़े धोने से लेकर हर बात में कमी निकालती रहती थी। इसके अलावा हर बात में रोका टोकी करती थी जिससे परेशान होकर वह अपने पीहर चली गई। महिला का पति फौज में नौकरी करता है और शिकायत दर्ज होने के बाद दो दिन की छुट्टी लेकर घर आया था। इसके बाद दोनों पक्षों की चार काउंसिलिंग करनी पड़ी, अब सब ठीक है।
केस 2:
एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाले एक व्यक्ति का गांव की ही एक महिला से अवैध संबंध चल रहा था। उसकी पत्नी ने एक दिन दोनों के सारे मैसेज पढ़ लिए और मायके चली गई। 2 साल मायके में रहने के बाद थाने में शिकायत दी। दोनों पति पत्नी को काउंसिलिंग के लिए थाने बुलाया गया तो महिला ने साफ कर दिया कि उसे पति के साथ नहीं रहना है। इसके बाद चार काउंसिलिंग की गई और पति ने अपनी गलती मानते हुए उसे भविष्य में न दोहराने का वादा किया तो बात बन गई।
बॉक्स:
माह मामले
जनवरी 23
फरवरी 18
मार्च 26
अप्रैल 43
मई 40
जून 49
जुलाई 43
अगस्त 34
सितंबर 35
अक्तूबर 39
नवंबर 41
दिसंबर 32
(कुल) (423)
वर्जन:
थाने में आने वाले हर मामले की तसल्ली से सुनवाई की जाती है और मामले की जड़ को समझने के बाद कोशिश यही रहती है कि परिवार किसी भी सूरत में टूटने न पाए। महिलाओं से अपील है कि सास अपनी बहू को बेटी व बहू अपनी सास को मां समझे, फिर कोई समस्या नहीं आएगी। -निरीक्षक मंजूषा, इंचार्ज, महिला थाना, नारनौल।