नारनौल। यदि आपको भी 10 रुपये में भरपेट भोजन चाहिए तो शहर की अनाज मंडी स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय बिल्डिंग के प्रथम तल पर पहुंच जाइये।
इस महंगाई के दौर में जहां एक आदमी का पेट 100 रुपये में भी नहीं भर पाता, वहीं शहर में एक स्वयं सहायता समूह की 6 महिलाएं 2 सालों से केवल 10 रुपये में गरीब व मजदूरों को भर पेट खाना खिला रही हैं।
ये महिलाएं रोजाना अपने हाथों से ताजा सब्जी लाकर लजीज खाना पकाती हैं और दोपहर को भोजन के लिए मजदूरों की यहां अच्छी भीड़ देखने को मिलती है।
रोजाना अलग बनती है सब्जी
गांव नांगलकाठा की प्रियंका ने बताया कि खाने में कभी दाल तो कभी कढ़ी के साथ चावल और रोटी मिलती हैं। इनके अलावा एक सूखी सब्जी भी बनाई जाती है जो रोजाना उसी दिन मंडी से खरीदकर फिर बनाई जाती है। इस भोजन की एवज में उनके द्वारा केवल 10 रुपये ही लिए जाते हैं।
खाने का पैसा खाने में ही होता है इस्तेमाल
प्रियंका ने बताया कि मजदूरों से मिलने वाला पैसा रसोई का सामान खरीदने में ही प्रयोग किया जाता है। साथ ही इसी पैसे से उनका मेहनताना भी निकाला जाता है जो महीने की पहली तारीख को सब में बांटा जाता है। प्रियंका ने बताया कि इस काम में उसकी गांव चिंडालिया की रेनू, सरिता, राजबाला, रेखा व संगीता बराबर की मदद करती हैं।
बारी बारी से लेती हैं अवकाश
प्रियंका ने बताया कि वैसे तो वह सब साल के 365 दिन बड़े त्योहारों को छोड़कर काम करती हैं लेकिन घर के कामों के चलते वह आपस में बारी बारी से साप्ताहिक अवकाश भी करती हैं।
ऐसे हुई शुरुआत
प्रियंका काम की तलाश में थी ताकि घरवालों की आर्थिक सहायता में वह भी मदद कर सके। इसी दौरान उसकी मुलाकात मीना मैडम से हुई और उन्हीं ने उसे इस काम के बारे में बताया। इसके बाद एक टीम तैयार कर काम शुरू कर दिया। इस तरह 10 रुपये में गरीब मजदूरों को खाना खिलाकर पुण्य तो मिल ही रहा है साथ ही आर्थिक लाभ भी हो रहा है।