नारनौल। गांव अटाली में डेयरी पशुओं में तेजी से फैल रहे थनैला रोग को लेकर शनिवार को जागरूकता एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि दूध में कमी, थनों में सूजन, दर्द या खून-मवाद के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। शिविर में दूध के सैंपल लेने की सही प्रक्रिया भी समझाई गई।
शिविर में वैज्ञानिकों ने बताया कि थनैला रोग डेयरी पशुओं में गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यह रोग जीवाणु, विषाणु, फफूंद, यीस्ट संक्रमण और चोट के कारण भी हो सकता है।
यह शिविर लाला लाजपत राय पशु-चिकित्सा एवं पशु-विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दिनेश मित्तल की देखरेख में वैज्ञानिक डॉ. ज्योति शुन्थवाल और डॉ. देवेंद्र सिंह ने किया।
डॉ. ज्योति शुन्थवाल ने कहा कि इस बीमारी का उपचार लंबा और महंगा होता है, इसलिए बचाव सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने पशुपालकों को दूध निकालने से पहले हाथ और थनों की अच्छी तरह सफाई, स्वच्छ बर्तनों का उपयोग और दूध निकालने के बाद थनों पर दवा का छिड़काव करने की सलाह दी। साथ ही पशु को दूध निकालने के बाद कुछ समय तक खड़ा रखने पर जोर दिया।